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आखिर क्यों स्थिर हो गयी है गिद्धों के कुछ प्रजातियों की आबादी ?

इंडियास्पेंड, 19 फरवरी

कार्बेट टाइगर रिजर्व से उड़ा एक शिकारी परिंदा, सफेद दुम वाला गिद्ध, करीब 200 किमी दूर देहरादून के पास सेलाकुई क्षेत्र के आसपास डेरा डाले हुए है। क्या इतनी लंबी उड़ान का उद्देश्य भोजन है, साथी की तलाश है, क्या वह यहां अपना घोंसला बनाएगा, या वापस लौटेगा, ऐसे कई सवाल हैं, जिनके जवाब, उसके दो पंखों के बीच लगे सैटेलाइट टैग से मिलेंगे।

इन शिकारी पक्षियों की मौजूदा स्थिति, उड़ान के रास्ते, घोंसले बनाने, प्रजनन जैसी जानकारियों को जुटाने के लिए उत्तराखंड वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण के लिए कार्य कर रही संस्था डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के साथ मिलकर, सफेद दुम वाले दो गिद्ध (White-rumped Vulture, Gyps bengalensis) और एक इजिप्टियन गिद्ध (Neophron percnopterus) को, नवंबर 2023 में, टैग किया।

उत्तराखंड के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ समीर सिन्हा कहते हैं “सेटेलाइट डाटा से हमें पता चलेगा कि किन जगहों पर गिद्ध खुलकर उड़ान भर रहे हैं, किन क्षेत्रों में उड़ने से वे बच रहे हैं, ताकि हम इसके कारणों को समझ सकें। हमारे पास गिद्धों से जुड़ा प्राथमिक डाटा ही उपलब्ध नहीं है। सेटेलाइट टैग वाले गिद्धों की उड़ान वाले क्षेत्रों को हम मॉनिटर करेंगे। अगर किन्हीं हालात में उनकी मृत्यु हुई तो समय रहते उन तक पहुंचना और मौत की वजह पता लगाना आसान होगा। ये सामान्य मौत थी या डायक्लोफेनेक जैसी एनएसएआईडी दवा इसकी वजह थी”।
पूरी रपट- इंडियास्पेंड