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आपदा के मददगार: कोरोना के खौफ से अपने भी जिन शवों को हाथ नहीं लगाते, ये उनका अंतिम संस्कार करते हैं

-गांव कनेक्शन,

"यहां कोविड-19 के हालात बहुत खराब हैं। उद्गीर जैसे छोटे से शहर में रोजाना 10-20 लोगों की मौत होती है। कोरोना का इतना खौफ है कि अक्सर परिवार वाले डेड बॉडी को हाथ नहीं लगाते। शहर तो दूर गांव में ऐसे ही हालात हैं, फिर हम लोग उनका अंतिम संस्कार करते हैं। इस साल अब तक 140 लोगों का अंतिम संस्कार किया है।" गौस शेख ने गांव कनेक्शन को बताया। गांव कनेक्शन ने जब पहली बार गौस शेख को फोन किया तो वो एंबुलेंस चला रहे थे, क्योंकि उन्हें एक शव को उसके गांव तक पहुंचाकर अंतिम संस्कार करना था।

कुछ घंटे बाद जब गांव कनेक्शन ने दोबारा गौस शेख (33 वर्ष) को कॉल किया तो पता चला कि गौस और उनके तमाम साथियों के पास इन दिनों दो ही मुख्य काम हैं, जो भूखे हैं उनके लिए खाने का इंतजाम करना और दूसरा ऐसे लोगों का अंतिम संस्कार करना, जिनकी कोविड या दूसरी बीमारियों से मौत हो गई है और कोई अंतिम संस्कार करने वाला नहीं या संक्रमण के डर से घर वाले हाथ नहीं लगा रहे। इनकी कोशिश रहती है कि कोई भी भूखा न रहे। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई (Mumbai) से करीब 600 किलोमीटर दूर उदगीर शहर है। ये सूखे के लिए कुख्यात मराठवाड़ा के लातूर जिले की एक तालुका (तहसील) है, लेकिन इस बार यहां से भी गर्मियों में पानी की किल्लत की जगह कोरोना के कहर की खबरें आ रही हैं। उद्गीर में ही गौस शेख अपने कुछ साथियों की मदद से रोटी कपड़ा बैंक चलाते हैं।

गौस बताते हैं, "आपने जब फोन किया था उस वक्त उद्गीर से 12 किलोमीटर दूर कमालनगर में एक महिला (राचप्पा कुलकर्ण) का शव लेकर जा रहा था। उनका अंतिम संस्कार करना था, सिविल अस्पताल में उनकी मौत हुई थी।" गौस की संस्था का नाम सलात माइनरटीज वेलफेयर सोसायटी है, जिसमें करीब 50 सक्रिय सदस्य हैं। गौस इसके सचिव हैं। "मेरे परिवार के 10 लोग कोविड़ की चपेट में आए थे, बाकि लोग ठीक हो गए, लेकिन दादी नहीं रहीं। उनके शव का भी अंतिम संस्कार रोटी-कपड़ा बैंक वालों ने किया। हम लोग सब क्वारिटींन थे। मैंने देखा है ये लोग शहर के अलावा गांवों और आसपास के कस्बों में अंतिम संस्कार के लिए जाते हैं।" अदिति पाटिल गांव कनेक्शन को बताती हैं। आदिति सामाजिक कार्यकर्ता हैं और लिंगायत समुदाय से तालुक रखती हैं, जहां शव को दफनाने का रिवाज हैं। हालांकि कोरोना के संक्रमण को देखते हुए सभी शवों को जलाया जा रहा है।

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