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आरटीई में प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट ने उप्र सरकार से मांगा जवाब

माला दीक्षित, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों में आरटीई (शिक्षा का अधिकार) कानून लागू करने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। निजी स्कूलों के संघ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें कहा गया है कि आरटीई कानून में 25 फीसद कोटा के तहत निजी स्कूलों में भी प्रवेश लिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह नोटिस न्यायमूर्ति जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने इनडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से दाखिल याचिका पर वकील रवि प्रकाश गुप्ता की दलीलें सुनने के बाद जारी किया। कोर्ट ने इस याचिका को पहले से लंबित ऐसे ही एक मामले के साथ संलग्न करने का आदेश दिया है। यह मामला उत्तर प्रदेश सरकार के तीन दिसंबर 2012 के जीओ की व्याख्या से जुड़ा है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इसी वर्ष गत एक मार्च को दिये गये फैसले में इस जीओ की व्याख्या करते हुए कहा था कि कमजोर वर्ग के बच्चे को मुफ्त शिक्षा के अधिकार कानून के तहत अपनी पसंद के दूसरे स्कूल भी चुनने का अधिकार है चाहें सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल उसके घर से ज्यादा पास क्यों न हों। यानी आरटीई कानून के तहत 25्र फीसद कोटे में निजी स्कूलों में भी प्रवेश लिया जा सकता है।


निजी स्कूलों की दलील

हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए निजी स्कूलों के संघ ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि हाई कोर्ट का यह आदेश गलत है। हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के जीओ की गलत व्याख्या की है। इतना ही नहीं याचिका में प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में कुल बच्चों और खाली सीटों के आंकड़े पेश करते हुए ये भी दलील दी गई है कि जब सरकारी स्कूलों में सीटें खाली हैं तो निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश की इजाजत कैसे दी जा सकती है।

संघ का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश से राज्य सरकार पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ेगा। एक तो राज्य सरकार सरकारी स्कूलों के रख रखाव पर खर्च कर रही है और उसकी सीटें खाली पड़ी हैं। दूसरे सरकारी स्कूलों में सीटें खाली रहते हुए भी अगर बच्चे आरटीई में निजी स्कूलों में प्रवेश लेते हैं तो कानून के मुताबिक राज्य सरकार को प्रत्येक बच्चे पर 450 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से निजी स्कूल को सब्सिडी की रकम का भुगतान करना पड़ता है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई है।