Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/एक-नहीं-पांच-लोकपाल-हों-अरुणा-राय-3933.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | एक नहीं, पांच लोकपाल हों - अरुणा राय | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

एक नहीं, पांच लोकपाल हों - अरुणा राय

प्रभात खबर चाहता है कि जनलोकपाल और भ्रष्टाचार पर आम लोगों के बीच स्वस्थ विमर्श का सिलसिला शुरू हो. इसके लिए जरूरी है कि इन मुद्दों पर असहमति के बिंदुओं और वैकल्पिक विचारों की भी जानकारी सबको हो. इस क्रम में हम सरकारी लोकपाल और जनलोकपाल विधेयक में बिंदुवार अंतर दे रहे हैं. साथ में पढ़ें राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की सदस्य अरुणा राय के विचार. असहमति का स्वर रखनेवाली अरुणा राय राजनैतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता (ऐक्टविस्ट) हैं. उन्होंने ने देश के लोगों के नाम पत्र लिखा है, जिसे हम यहां प्रकाशित कर रहे हैं.

लोकपाल विधेयक अब संसद में है. हम आपको इसी मामले पर पत्र लिख रहे हैं, क्योंकि यह हम-आप यानी सबके लिए समान रूप से चिंता की बात है. जब लोकपाल की संयुक्त मसौदा समिति जन लोकपाल के मसौदे पर काम कर रही थी, तब भी एनपीआरआइ (नेशनल कैंपेन फ़ॉर पीपुल्स राइट टू इनफ़ॉरमेशन) ने इसके अध्यक्ष प्रणब मुखर्जी और सह अध्यक्ष शांति भूषण को पत्र लिख कर इस पर सबकी राय लेने और देशव्यापी संवाद का आग्रह किया. उस समय दोनों ने हमें आश्वस्त किया कि ऐसा ही होगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. जब मॉनसून सत्र में संसद में पेश करने के उद्देश्य से लोकपाल बिल कैबिनेट में लाया गया, तो एनसीपीआरआइ ने इसकी असलियत जानने का फ़ैसला किया.

एनसीपीआरआइ ने इसके इतर भी लगातार लोकपाल पर लोगों से राय-मशविरा और संवाद जारी रखा और इसका जो निचोड़ निकला, हमने कई सेटों में इसे तैयार किया और फिर से लोगों में बांटने का भी काम किया. यह काम अब भी जारी है.आपको याद दिला दें कि एनसीपीआरआइ ने 1996 में सूचना के अधिकार कानून की मांग के साथ ही देश में एक ऐसे मजबूत कानून की बात शुरू कर दी थी, जो भ्रष्टाचार और सत्ता का दुरुपयोग रोक सके. तभी हमने अपना अभियान शुरू कर दिया था. हमारी यह भी मांग रही है कि जिम्मेदारी तय करने के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ़ आवाज उठानेवाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की हत्या और दमन को रोकनेवाला एक ह्विसल ब्लोअर बिल भी लाया जाये. क्योंकि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़नेवाले हमारे कई सामाजिक कार्यकर्ता अब तक जान गंवा चुके हैं. इसके लिए सितंबर 2010 में सरकार ने एक समिति भी बनायी थी, पर इस दिशा में कुछ हुआ नहीं. लोकपाल का मुद्दा एनसीपीआरआइ कार्यकारिणी की बैठक में भी हमारे कुछ सदस्यों ने उठाया, लेकिन ये विचार-विमर्श तक ही सीमित रहे.

लोकपाल पर चर्चा अब तक दिलचस्प मोड़ ले चुकी है. इसकी शुरुआत भ्रष्टाचार के खिलाफ़ मध्यवर्ग की एकजुटता से हुई थी और अंत लोकपाल बिल पर संयुक्त मसौदा समिति के गठन की मांग पर. आम लोगों की धारणा है कि भ्रष्टाचार तो हर जगह है, लेकिन राजनीति और सरकारी स्तर पर यह व्यापक रूप में है. इसलिए राजनीतिज्ञों का सार्वजनिक जीवन साफ़-सुथरा हो और आम लोगों के संवैधानिक एवं अन्य अधिकारों के साथ खिलवाड़ न हो, आज इसकी जरूरत सबको है. लोग यह भी महसूस कर रहे हैं कि सत्ता के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार पर लगाम लगनी ही चाहिए. लोकपाल को पहले इस तरह आम लोगों के सामने इस तरह पेश किया गया, जैसे वह कोई जादू की छड़ी हो और उससे सभी तरह के भ्रष्टाचार दूर हो जायेंगे.

जब सरकारी और जन लोकपाल बिल के मसौदे में यह दावा किया गया कि इस तरह के मजबूत लोकपाल से ही सभी समस्याओं का हल होगा, भ्रष्टाचार समाप्त हो जायेगा, तब हम चुप नहीं रह सके. इसलिए नहीं कि यह सब तरह के भ्रष्टाचार को दूर नहीं कर सकेगा, इसलिए भी कि यह दावा सच्चाई से परे है. इस एकमात्र बिल से कोई चमत्कार नहीं होनेवाला. जन लोकपाल का मसौदा भी अपने आप में कई सवाल उठाता है. इस बिल पर कुछ आम सभाएं हुईं, लेकिन चर्चा बहुत कम हुई. जबकि लोकपाल जैसे महत्वपूर्ण बिल का मसौदा बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा बहस की जरूरत थी. हो सकता है, इस पर बहस होती, तो हम कई बिंदु पर इससे इत्तफ़ाक नहीं रखते. पर, स्वस्थ बहस के बाद जो मसौदा तैयार होता, उसकी ज्यादा से ज्यादा स्वीकारोक्ति होती और एक मजबूत लोकपाल की पृष्ठभूमि तैयार होती. एनसीपीआरआइ का मानना है कि प्रधानमंत्री से पटवारी तक सबको लोकपाल के दायरे में लाने से सारी शक्तियां एक संस्था में निहित हो जायेंगी. इससे शक्तियों का विकेंद्रीकरण नहीं हो पायेगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसा करना अहितकर होगा. इसलिए साफ़ कह सकते हैं कि जन लोकपाल बिल का मसौदा भी अव्यावहारिक है.

मुङो यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि सरकार द्वारा संसद में पेश मसौदा भी दोषपूर्ण है. इसीलिए एनसीपीआरआइ ने अपना लोकपाल बिल तैयार किया है. इसमें पहले के दोनों मसौदे से बेहतर प्रावधान हैं और भ्रष्टाचार से निबटने के उपाय भी. हम आपको दोनों लोकपाल बिल के इतर एक अन्य मसौदा भेज रहे हैं. हम इस मसौदे को संसद की स्थायी समिति के सामने भी पेश करेंगे. आप इसकी समीक्षा कर सकते हैं, आम चर्चा करवा सकते हैं. अपने दोस्तों या अन्य इच्छुक लोगों को भेज सकते हैं.

।। आपकी अरुणा राय ।।

- एनसीपीआरआइ के पांच लोकपाल -

* राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निवारण लोकपाल : कुछ शर्तो के साथ प्रधानमंत्री को इसके दायरे में लाया जाये. प्रधानमंत्री के खिलाफ़ भ्रष्टाचार का मामला चलाने का फ़ैसला लोकपाल की पूर्ण पीठ करे और सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ इसका अनुमोदन करे. सांसद और सभी मंत्री लोकपाल के दायरे में रहें. सीनियर नौकरशाह और निजी संस्थानों के बड़े अफ़सर भी इसके दायरे में हों.(यह लोकपाल ओर्थक, प्रशासनिक स्तर पर स्वतंत्र होगा और इसे जांच करने व सजा देने का भी अधिकार होगा)

* केंद्रीय सतर्कता लोकपाल : दूसरी व तीसरी श्रेणी के अफ़सरों के भ्रष्टाचार के लिए सतर्कता आयोग को ही और ताकतवर बनाया जाये.

* पृथक न्यायपालिका लोकपाल : न्यायपालिका को मजबूत और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए अलग से लोकपाल हो.

* शिकायत निवारण लोकपाल : जन शिकायतों के जल्द निपटारे के लिए शिकायत निवारण लोकपाल हो.

* लोकरक्षक कानून लोकपाल : भ्रष्टाचार की शिकायत करनेवालों की सुरक्षा के लिए लोकरक्षक कानून लोकपाल हो.