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एजेंसियों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, एसआईटी को कालेधन पर पांच जांच रिपोर्ट सौंपी

उच्चतम न्यायालय को बताया गया कि पनामा दस्तावेज लीक में कथित तौर पर विदेशों में बैंक खाते रखने वाले जिन भारतीयों के नाम सामने आए थे उनसे संबंधित पांच जांच रिपोर्ट विशेष जांच दल (एसआईटी) के समक्ष पेश की जा चुकी हैं। ये रिपोर्टें सीबीडीटी, रिजर्व बैंक, वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) और प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को मिलाकर बनाई गई बहु-एजेंसी समूह (मैग) ने तैयार की हैं। उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति दीपक मिश्र और अमिताव राय की पीठ को सोमवार (24 अक्टूबर) को यह जानकारी जांच एजेंसियों ने दी। उन्होंने कहा कि एसआईटी इस मामले को देख रही है। इस मामले में जन-हित याचिका दायर करने वाले वकील एम.एल. शर्मा ने सोमवार को न्यायालय से कहा कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई 24 नवंबर को तय कर दी।


इससे पहले 3 अक्तूबर को शीर्ष अदालत को आर्थिक मामले विभाग ने बताया था कि स्विस प्रशासन द्वारा कोई सूचना नहीं दिए जाने के बावजूद 8,186 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति को कर दायरे में लाया गया। केन्द्र ने पनामा दस्तावेज लीक मामले में अदालत की निगरानी में सीबीआई की जांच किए जाने संबंधी जनहित योचिका को खारिज करने का आग्रह किया है। केन्द्र ने कहा है कि कर चोरी करने पर 159 मामलों में 1,282 करोड़ रुपए का कर लगाया गया है। केन्द्र ने बताया, ‘75 मामलों में अब तक मुकदमे के लिए 164 शिकायतें दायर की गयी हैं। शीर्ष अदालत द्वारा कालेधन पर गठित की गई एसआईटी को इन सभी जांच कार्यों के बारे में बराबर अवगत कराया जा रहा है।' वित्त मंत्रालय ने अधिवक्ता शर्मा की उस अंतरिम याचिका में लगाए गए आरोपों का जवाब देने से भी इनकार कर दिया जिसमें मंत्रालय को यह निर्देश देने को कहा गया है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को अगले आदेश तक पूंजी बाजार से अपना धन नहीं निकालने देना चाहिए। ये विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक पार्टिसिपेटरी नोट के जरिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश करते हैं।


मंत्रालय ने कहा कि यह मामला पूंजी बाजार नियामक सेबी से जुड़ा है और वही इस मामले में सक्षम प्राधिकरण है। मंत्रालय ने जनहित याचिका में सेबी अध्यक्ष यू.के. सिन्हा को सेबी प्रमुख के तौर पर फिर से नियुक्त करने को अवैध बताने और नियुक्ति को खारिज करने के अदालत से किए गए आग्रह का भी विरोध किया है। वित्त मंत्रालय ने जनहित याचिका को खारिज करने का आग्रह करते हुए कहा कि कालेधन पर गठित एसआईटी को नियमित तौर पर विभिन्न जांच घटनाक्रमों से लगातार अवगत कराया जा रहा है। जनहित याचिका में पनामा दस्तावेज लीक मामले की अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच कराए जाने का आग्रह किया गया है। इन दस्तावेजों में 21 विभिन्न अधिकार क्षेत्रों वाले देशों में निवेश अथवा बैंक जमा होने के बारे में 2,10,000 कंपनियों से संबंधित 1.10 करोड़ दस्तावेज की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि इन दस्तावेजों में 500 भारतीयों के नाम हैं। कथित रूप से इनके अनुसार कई अभिनेता, उद्योगपति तथा अन्य लोग शामिल हैं जिन्होंने कथित तौर पर अपना धन विदेशी बैंक खातों और कंपनियों में निवेश किया है।