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कानून से बचने के लिए क्या रास्ता अपनाते हैं आरओ प्लांट संचालक?

डाउन टू अर्थ, 26 मार्च

दिल्ली से लेकर देश के सूखाग्रस्त इलाकों में भी भूजल निकालकर आरओ प्लांट्स के जरिए पानी फिल्टर करने की होड़ चल पड़ी है। इसमें अनगिनत प्लांट्स ऐसे हैं जिनके पास किसी तरह की अनुमतियां नहीं हैं और न ही वे भारत मानक ब्यूरो के दायरे में ही आते हैं। दिल्ली ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार में ऐसे कई जिले हैं जहां एक भी बीआईएस मानक पर रजिस्टर्ड व्यावसायिक प्लांट नहीं हैं। हालांकि, जमीन पर ऐसे प्लांट्स काफी बढ़ गए हैं।

व्यावसायिक आरओ प्लांट ने ऐसे रास्ते खोजे हैं जिनसे इन्हें पानी आपूर्ति में बाधा न आए। इन प्लांट को बीआईएस मानक लेना अनिवार्य है लेकिन यह निमय उन्हीं पर लागू है जो पानी को बंद जार या पैकेट में बेचते हैं। जबकि आरओ प्लांट्स से जो खुला पानी बेचते हैं वह नियम के दायरे में नहीं आते। ऐसे आरओ प्लांट्स को जमीन से पानी निकालने के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड, संचालन के लिए नगर निगम या नगर पालिका, बिजली विभाग, उद्यम विभाग से अनुमतियां लेनी होती हैं।

उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद में बीते एक वर्ष में 122 ऐसे आरओ व्यावसायि प्लांट पर कार्रवाई की गई है जो खुला या खुले जार में पानी बेच रहे थे। गाजियाबद भूजल के मामले में एक नोटिफाई क्षेत्र यानी संवेदनशील है। गाजियाबाद डिस्ट्रिक्ट वाटर काउंसिल के नोडल अधिकारी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हरिओम सिंह डाउन टू अर्थ से बताते हैं कि आरओ प्लांट के जरिए खुला पानी बेचने वाले बीआईएस के रेग्युलेशन में नहीं आते और छिपकर काम करते हैं। वह ह बताते हैं कि अभी उनके पास जब कोई शिकायत आती है तो तभी वह कार्रवाई करते हैं। इन प्लांट्स की गिनती को लेकर या सर्वे को लेकर अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।

देश में करीब 6328 यूनिट्स ही बीआईएस मानक 4543:2016 के तहत लाइसेंसधारी हैं। बीआईएस का मानक आईएस 14543:2016 व्यावसायिक आरओ प्लांट्स को यह सुनिश्चित करने के लिए कहता है कि वह पानी को पैक करके बेचे और ग्राहकों को तय गुणवत्ता की संपूर्ण जानकारी दे। इस मानक के तहत आरओ प्लांट वाले को हर पैक या जार पर न सिर्फ मैनुफैक्चरिंग, उत्पादन, पैकेजिंग की तारीख की पूरी जानकारी बल्कि एक्सपायरी और पानी के विभिन्न पैरामीटर्स की विस्तृत जानकारी देनी होती है। साथ ही पैकेट और बोतल भी मानकों के अनुरूप होना चाहिए। हालांकि, इन नियमों का बिल्कुल पालन नहीं किया जाता। सबसे बड़ी बात यह है कि इस लाइसेंस को हर साल रिन्यू कराना होता है लेकिन ज्यादातर इसे समय पर मानक लाइसेंस को रीन्यू नहीं कराती हैं।
पूरी खबर- डाउन टू अर्थ