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कॉप-28: लंबी खींचतान के बाद क्लाइमेट पर नए प्रस्ताव पर सहमति लेकिन नीयत सवालों के घेरे में

कार्बनकॉपी, 14 दिसम्बर 

लंबी खींचतान के बाद आखिरकार दुबई वार्ता में एक नए क्लाइमेट प्रस्ताव पर सहमति हो गई लेकिन इसमें जीवाश्म ईंधन के प्रयोग को खत्म करने या भारी कटौती के लिए प्रावधानों का अभाव है। पिछले दो हफ्ते से संयुक्त अरब अमीरात की मेजबानी में हुए इस सम्मेलन में कई विवाद उठे और जीवाश्म ईंधन, क्लाइमेट फाइनेंस और एडाप्टेशन जैसे मुद्दों पर गहरी चर्चा हुई। हालांकि सम्मेलन के पहले दिन लॉस एंड डैमेज पर बने फंड के क्रियान्वयन को एक सकारात्मक परिणाम के रूप में देखा जा रहा है। 

क्लाइमेट वार्ता में सबसे प्रमुख मुद्दा इस बात का आकलन करना था कि पिछले 5 सालों में अलग अलग देशों ने जलवायु परिवर्तन को रोकने के क्या उपाय किए और वह कितने कारगर रहे। इसे क्लाइमेट चेंज की भाषा में ग्लोबल स्टॉकटेक या जीएसटी कहा जाता है। जीवाश्म ईंधन (जैसे कोयला, तेल और गैस) का प्रयोग खत्म करने (फेज़ आउट) की भाषा क्या हो इसे लेकर काफी खींचतान हुई। पृथ्वी पर हो रहे कुल कार्बन उत्सर्जन का 80% हिस्सा जीवाश्म ईंधन का ही है। 

सहमति प्रस्ताव में कहा गया कि 2050 तक नेट ज़ीरो हासिल करने के लिए उचित, व्यवस्थित और न्यायसंगत तरीके से जीवाश्म ईंधन से दूर जाने की इस महत्वपूर्ण दशक में कोशिश की जाएगी। अनियंत्रित कोयले के प्रयोग को फेज-डाउन (कम करने) के लिये प्रयासों में तेज़ी की बात कही गई। 

समापन भाषण में सम्मेलन के अध्यक्ष सुल्तान अल जबेर ने कहा कि धरती का तापमान 1.5 डिग्री से कम करने की दिशा में यह संधि ऐतिहासिक है लेकिन जानकारों की प्रतिक्रिया मिलीजुली है। 

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