Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/क-य-द-श-क-क-स-न-न-अपन-र-वण-क-श-न-ख-त-कर-ल-ह.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | क्या देश के किसानों ने अपने ‘रावणों’ की शिनाख़्त कर ली है? | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

क्या देश के किसानों ने अपने ‘रावणों’ की शिनाख़्त कर ली है?

-न्यूजक्लिक,

रावण एक मिथकीय पात्र है। जिसे एक प्रवृत्ति के तौर पर देखा जाता रहा है। दशहरे के रोज़ इस मिथकीय पात्र का दहन किया जाता है जिसे असल में खराब प्रवृत्तियों के नाश के रूप में समाज द्वारा ग्रहण किया जाता है। दिलचस्प ये है कि समाज में मौजूद खराब प्रवृत्तियाँ हर साल पैदा हो जाती हैं और हर साल उनका नाश होता है। रावण का इस तरह हर साल नाश किया जाना अधर्म और असत्य की निरंतर मौजूदगी का एहसास हमें कराता रहता है। इसे हिन्दी की ‘दूसरी परंपरा की नींव रखने वाले हजारी प्रसाद द्विवेदी के प्रसिद्ध निबंध ‘नाखून क्यों बढ़ते से हैं’ के संदर्भ में देखना चाहिए जहां वह कहते हैं कि ‘बढ़ते हुए नाखून हमारे पशु होने की निशानी हैं और यह हमें याद दिलाते हैं कि हमारे अंदर पशु प्रवृत्ति अभी भी मौजूद है’। इस तरह हम देखें तो हम सब में रावण मौजूद है। और हर वक़्त होता है। जिस तरह हम अपने नाखून काटकर इंसान बनने का प्रयत्न करते हैं उसी तरह हर साल दशहरे पर रावण को जलाकर भी बुराइयों से निजात पाने का उद्यम करते हैं।

सालों से रावण का पुतला जलाया जाना एक धार्मिक और सांस्कृतिक रिवाज की तरह अपना लिया गया है। रावण का पुतला जलाने वाले को राम के तुल्य मान लिया जाता है। राम जो रावण रूपी प्रवृत्ति के नाश का माध्यम बने। राम, जिन्होंने रावण का नाश करके धरती से अधर्म का नाश किया और धर्म की स्थापना की। राम, जिसने धर्म के मूल में न्याय और समता की स्थापना की। हिंदुस्तान में रामायण एक सर्वव्यापी महाकाव्य है और इसके तमाम अच्छे बुरे चरित्र भी समाज में किसी न किसी रूप में बने हुए हैं।

सन् 2020 का यह दशहरा इस लिहाज़ से यादगार और उल्लेखनीय रहेगा कि इस बार किसानों ने अपनी ज़िंदगी को प्रभावित करने वाले रावणों की शिनाख्त कर ली है। यह सही है या गलत है? कानूनी रूप से उचित है या अनुचित है? जैसे प्रश्नों के मायने इसलिए बहुत नहीं हैं क्योंकि ऐसा होता आया है। लोग जिसे अपने समय की सबसे बड़ी बुराई मानते हैं उसे रावण का स्वरूप दे देते हैं।

राजनीतिक दल भी अक्सर यह उपक्रम करते रहे हैं और धरने-प्रदर्शन के दौरान इस तरह पुतले जलाते आए हैं।

पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.