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क्या है कॉप 28 और दक्षिण एशिया के लिए इसके क्या मायने हैं?

द थर्ड पोल, 07 दिसम्बर

कॉप 28, इस वर्ष का एक महत्वपूर्ण संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन है। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के साझेदारों के सम्मेलन को ‘कॉप’ कहा जाता है। 

कॉप 28 में इसके 198 हस्ताक्षरकर्ता एक मंच पर होंगे। ये सभी जलवायु परिवर्तन को सीमित करने और इसके प्रभावों को अनुकूलित करने के प्रयासों पर चर्चा के लिए हर साल मिलते हैं। संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश और यूरोपीय संघ, यूएनएफसीसीसी के पक्षकार हैं।

2015 में पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद से, जलवायु परिवर्तन से जुड़े इन सम्मेलनों यानी कॉप्स ने ग्लोबल वार्मिंग को “2 डिग्री सेल्सियस से नीचे” तक सीमित करने और “पूर्व-औद्योगिक स्तरों से तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने” के अपने लक्ष्य की दिशा में इसके कार्यान्वयन और प्रगति पर ध्यान केंद्रित किया है।
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