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कोरोना संकट से लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए मोदी सरकार के पास क्या हैं रास्ते

-बीबीसी, 

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रविवार को केंद्र सरकार की ओर से आए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज़ को नाकाफ़ी बताया है.

उन्होंने कहा है कि सरकार की ओर से 10 लाख करोड़ रुपये या जीडीपी का दस फीसदी वाला पैकेज़ जारी होना चाहिए क्योंकि वर्तमान पैकेज़ ने कई क्षेत्रों जैसे ग़रीबों, प्रवासियों, किसानों, मजदूरों, कामगारों, छोटे दुकानदारों, और मध्य वर्ग की उचित मदद नहीं की है.

वहीं, बीजेपी की ओर से सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनल की बहसों में कांग्रेस की आलोचना पर पुरजोर ढंग से जवाब दिया जा रहा है.

लेकिन पी चिदंबरम ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक राय दी है कि सरकार को इस समय राजकोषीय घाटा बढ़ने की चिंता छोड़ देनी चाहिए.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार इस स्थिति में है कि वह आने वाले दिनों में राजकोषीय घाटा बढ़ाने का जोख़िम ले सके. बीबीसी ने इस विषय पर बेहतर जानकारी जुटाने के लिए आर्थिक मामलों के जानकार आलम श्रीनिवास से बात की है. इसके साथ ही बीजेपी के रुख को समझने के लिए बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण से बात की है.

क्या है चिदंबरम की राय
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के मुताबिक़, सरकार को फिलहाल फिस्कल डेफिसिट यानी राजकोषीय घाटा बढ़ने को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए.

उन्होंने कहा, "ये फिस्कल डेफिसिट के बारे में चिंता करने का समय नहीं है. अगर अतिरिक्त व्यय दस लाख करोड़ भी होता है और अतिरिक्त उधार भी दस लाख करोड़ होता है तो ये तय है कि इससे राजकोषीय घाटा बढ़ेगा लेकिन उसकी चिंता नहीं करनी चाहिए."

लेकिन बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण मानते हैं कि वह ज़्यादा पैकेज़ दिए जाने को लेकर चिदंबरम की राय से सहमत हैं लेकिन वे कांग्रेस पर इस पूरे विषय को ही स्पिन करने का आरोप लगाते हैं.

गोपाल कृष्ण कहते हैं, "चिदंबरम साहब इसे स्पिन करना चाह रहे हैं. जब वित्तमंत्री ने कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सारे आंकड़े दे दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि आरबीआई ने पहले जो स्टिमुलस पैकेज़ जारी किया है और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में 1,92,000 करोड़ पहले दिया है तो उसको मिलाकर ये पूरा पैकेज़ है."

"ऐसे में इस पैकेज़ के तीन अंग हैं. मॉनिटरी, फिस्कल और रिफॉर्म. वह बात कर रहे हैं फिस्कल स्टिमुलस की. लेकिन पैकेज़ में ये तीनों चीज़ें होती हैं. हम पूरे आर्थिक पैकेज़ की बात कर रहे हैं. सिर्फ मांग करने की जगह उन्हें सरकार को समाधान भी देना चाहिए. मांग तो मैं भी कर सकता हूँ, लेकिन आएगी कहाँ से इतनी बड़ी रकम?"

"अगर कांग्रेस सरकार वाले राज्यों की बात करें तो वहां उन्होंने कितना पैकेज़ दिया है. ये पूछने पर कहते हैं कि उनके पास पैसा नहीं है. तो क्या ये समस्या केंद्र सरकार के सामने नहीं है?"

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