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किसान आंदोलन: MSP पर माँग मान क्यों नहीं लेती मोदी सरकार? जानिए क्या हैं वजहें

-बीबीसी,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर दिया था. अब आज से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में इन कानूनों को निरस्त कर दिए जाएगा.

लेकिन किसान नेता अब भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को गारंटी देने के लिए एक कानून बनाए जाने की मांग कर रहे हैं.

किसान नेताओं ने कहा है कि जब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून नहीं आता तब तक पर प्रदर्शन करेंगे. समर्थन मूल्य पर किसानों की मांग है क्या ? और सरकार इसके लिए तैयार क्यों नहीं है?

इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए पिछले साल दिसंबर में हमने ये रिपोर्ट लिखी थी.

पंजाब हरियाणा उत्तर प्रदेश से दिल्ली की तरफ़ कूच कर रहे किसान हाल ही केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं.

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के मुताबिक़ उनकी अहम माँगों में से एक है, "सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमत पर ख़रीद को अपराध घोषित करे और एमएसपी पर सरकारी ख़रीद लागू रहे."

एमएसपी पर ख़ुद प्रधानमंत्री ट्वीट कर कह चुके हैं, "मैं पहले भी कहा चुका हूँ और एक बार फिर कहता हूँ, MSP की व्यवस्था जारी रहेगी, सरकारी ख़रीद जारी रहेगी. हम यहां अपने किसानों की सेवा के लिए हैं. हम अन्नदाताओं की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और उनकी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करेंगे."

उनका ये ट्वीट 20 सितंबर 2020 का है.

लेकिन ये बात सरकार बिल में लिख कर देने को तैयार नहीं है. सरकार की दलील है कि इसके पहले के क़ानूनों में भी लिखित में ये बात कहीं नहीं थी. इसलिए नए बिल में इसे शामिल नहीं किया गया है.

लेकिन बात इतनी आसान है, जैसा तर्क दिया जा रहा है?

दरअसल एमएसपी पर सरकारी ख़रीद चालू रहे और उससे कम पर फसल की ख़रीदने को अपराध घोषित करना, इतना आसान नहीं हैं जितना किसान संगठनों को लग रहा है.

सरकार के लिए ऐसा करना मुश्किल क्यों हैं?

ये जानने से पहले ये जानना ज़रूरी है कि एमएसपी क्या है और ये तय कैसे होता है.

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.