Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/कम-फीस-और-ज्यादा-गुणवत्ता-वाले-शिक्षा-संस्थानों-का-होना-बेहद-जरूरी-क्यों-है-13721.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | कम फीस और ज्यादा गुणवत्ता वाले शिक्षा संस्थानों का होना बेहद जरूरी क्यों है | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

कम फीस और ज्यादा गुणवत्ता वाले शिक्षा संस्थानों का होना बेहद जरूरी क्यों है

पिछले कुछ समय से पूरे देश में कई विश्वविद्यालयों के छात्र फीसवृद्धि को लेकर उत्तेजित हैं. पड़ोसी देश पाकिस्तान तक से इसी प्रकार के विरोध-प्रदर्शनों की खबरें आ रही हैं. शासक वर्ग की ओर से इसके प्रति या तो उदासीनता दिखाई जा रही है या फिर इसे राजनीतिक रंग देकर खारिज करने की कोशिश की जा रही है. विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर ज्यादा कुछ नहीं कर रहे हैं और न ही देश के अन्य युवा और जन-साधारण इस प्रश्न पर बड़ी संख्या में लामबंद हो रहे हैं. बल्कि युवाओं का एक बड़ा हिस्सा दिग्भ्रम का शिकार होकर उल्टे ऐसे आंदोलनों का मजाक बना रहा है. भारत जैसे देश में सस्ती या निःशुल्क शिक्षा जैसे सर्वाधिक महत्वपूर्ण मुद्दे पर जनसाधारण की यह उदासीनता चौंकाने वाली हो सकती है.

शिक्षा के दार्शनिक पक्षों पर चर्चा करना इस आलेख का उद्देश्य नहीं है. क्योंकि कई दार्शनिकों का तो यह भी मत रहा है कि शिक्षा ही मनुष्य की नैसर्गिकता और सहजता को समाप्त करने के लिए उत्तरदायी रही है. लेकिन आज जिस तरह के समाज में हम रह रहे हैं उसमें शिक्षा एक सामाजिक और सांस्कृतिक पूंजी का रूप ले चुकी है. यह सभ्य समाज में मानवीय गरिमा और नागरिकता की जिम्मेदारियों के साथ जीने के लिए एक अनिवार्य तत्व और शर्त बन चुकी है.

लेकिन सभी स्तरों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक सबकी समान पहुंच की मांग अब भी लोकप्रिय राजनीतिक मांग का रूप नहीं ले सकी है. दिलचस्प यह है कि इसका सबसे प्रमुख कारण समाज में अभी भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव ही है. हम अभी तक खुद ही यह समझ नहीं पाए हैं कि एक समाज के रूप में हमारी प्राथमिकताएं क्या हैं. इसलिए शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण संसाधन को पहली प्राथमिकता देने के लिए जिम्मेदार व्यवस्था पर हम कोई दबाव नहीं बना पाते हैं.

आज किसी भी समाज के लिए इतना स्पष्ट और प्रकट भेद किसी और स्तर पर नहीं दिखाई देगा जितना कि शिक्षा के स्तर पर दिखता है. बच्चे के जन्म के साथ ही यह लगभग तय हो जाता है कि उसके माता-पिता की आय के आधार उसे किस तरह की स्कूली शिक्षा मिल पाएगी. किस तरह की शिक्षा से यहां तात्पर्य है कि उसकी पढ़ाई का माध्यम कौन सी भाषा होगी, स्कूल में शिक्षकों के ज्ञान के स्तर से लेकर खेल एवं अतिरिक्त कला-कौशल के प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं कैसी होंगीं. उसके सर्वांगीण विकास और आत्मविश्वास के निर्माण के लिए दुनिया देखने-दिखाने का उसमें कितना अवसर होगा. अन्य संस्कृतियों के साथ घुलने-मिलने का कितना अवसर होगा. नवीनतम तकनीकों, अध्ययन-सामग्रियों और प्रयोगशालाओं की व्यवस्था कैसी और कितनी होगी. आधुनिक समय में बेहतर शिक्षा के ये ही मानदंड हैं.
 
पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.