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किसानों की सब्सिडी खा गए उद्यानिकी विभाग के अफसर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में उद्यानिकी विभाग के अफसरों ने किसानों को मिलने वाली सब्सिडी में बड़े पैमाने पर गोलमाल किया है। विभाग के अफसरों ने किसानों के खेतों में इवेपोरेटिव लो एनर्जी कूल चेंबर लगाए बिना ही सब्सिडी का पैसा निकाल लिया। खास बात यह है कि जब किसानों से कूल चेंबर के बारे में जानकारी ली गई, तो वह चौंक गए।

प्रदेश के 928 किसानों के नाम पर सब्सिडी का पैसा निकाला गया, लेकिन यह पैसा किसानों के पास नहीं पहुंचा। कृषि विभाग ने गड़बड़ी की उच्च स्तरीय जांच कराई, जिसमें वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ है। सूचना के अधिकार में मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय बागवानी मिशन की गाइडलाइन के अनुसार किसानों को कूल चेंबर लगाने के लिए दो-दो लाख की सब्सिडी दी जानी थी।

उद्यानिकी विभाग के अफसरों ने किसानों की जानकारी के बिना ही उनके नाम पर सब्सिडी जारी की। जांच रिपोर्ट के अनुसार, कूल चेंबर के लिए किसान से दो लाख रुपए लेने थे, लेकिन किसी भी किसान से पैसा नहीं लिया गया। यही नहीं, अधिकारियों ने जहां भी कूल चेंबर लगाने की जानकारी दी थी, वहां एक भी कूल चेंबर कार्यशील ही नहीं पाया गया।

खास बात यह है कि अधिकारियों ने भाजपा के कई बड़े नेताओं के नाम पर भी सब्सिडी में गड़बड़ी की है। भाजपा आईटी सेल के प्रदेश अध्यक्ष दीपक म्हस्के के ढोढरा गांव में कूलिंग चेंबर उनके बरामदे में पाया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, उनके घर पर पांच-छह महीने पहले कूलिंग सिस्टम लगा है। जांच में श्री म्हस्के ने स्वीकार किया है कि योजना के अनुरूप अलग से कोई चेंबर नहीं बनवाया है। इसके साथ ही गोकुल निर्मलकर, हरेंद्र अग्रवाल, रोहित सोनकर और शंभुनाथ सोनकर के नाम पर भी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है।

बैंक खातों में करना था ई-पेमेंट

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को किसानों को बैंक खातों में ई-पेमेंट से सब्सिडी की राशि भेजनी थी, लेकिन किसी भी किसान को ई-पेमेंट नहीं किया गया। इसमें वर्ष 2010-11 से वर्ष 2014-15 तक की सब्सिडी बंटवारे में गड़बड़ी सामने आई है। इसमें पांच एकड़ से बड़े किसानों को सब्सिडी नहीं देनी थी, लेकिन अधिकारियों ने बड़े किसानों के नाम पर भी सब्सिडी बांट दी।

अब होगी अनुदान राशि की वसूली

कृषि विभाग के आला अधिकारियों ने बताया कि जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी के लिए दोषी अधिकारी तय नहीं हो पाया है। अभी प्रारंभिक रिपोर्ट आई है, जिसमें गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि दोषी अधिकारियों के निर्धारण के बाद उनसे अनुदान की राशि की वसूली की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने तैयारी भी शुरू कर दी है।

बिना लगाए निकाली की सब्सिडी की राशि

जांच रिपोर्ट के अनुसार, गरियाबंद के पांच किसानों के कूलिंग चेंबर के नाम पर सब्सिडी निकाली गई, लेकिन एक भी किसान के खेत में कूल चेंबर नहीं लगाया गया। जांच के दौरान पाया गया कि फिंगेश्वर के किसान पुनाराम सोनकर, पवन सोनकर के निवास में संयंत्र स्थापित कर दिया गया, लेकिन सत्यापन के समय बंद था। पुनारद सोनकर के खेत में इसे लगाया ही नहीं गया। सुनील नागरची के खेत में इसे स्थापित नहीं किया गया और सभी सामग्री अलग-अलग पाई गई। चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि चंद्रशेखर हरी के पोल्ट्री फार्म में मशीन बंद रखी गई थी। वहीं नेकराम, राजेश्वर ध्रुव और तोरण लाल के घर में सामग्री मिली।

बिना वेरिफिकेशन बांट ली सब्सिडी की राशि

आम आदमी पार्टी के पोल खोल विंग के संयोजक उचित शर्मा ने आरटीआई के माध्यम से खुलासा करके आरोप लगाया कि उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बिना वेरिफिकेशन के ही सब्सिडी की राशि की बंदरबांट की है। इसमें उद्यानिकी विभाग के संचालक से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारी शामिल है। श्री शर्मा ने आरोप लगाया कि किसानों के पास से दो अलग-अलग स्पेसिफिकेशन के उपकरण पाए गए हैं, जो आर्थिक गड़बड़ी का खुलासा करते हैं।

किसानों को एनर्जी कूल चेंबर की सब्सिडी में गड़बड़ी हुई है। विभागीय जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि किसानों से राशि लिए बिना ही संयंत्र स्थापित किया गया है। एक भी संयंत्र कार्यशील नहीं है, जो गंभीर वित्तीय अनियमितता दर्शाता है। जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।- अजय सिंह, एसीएस, कृषि विभाग