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केंद्रीय परियोजनाओं को भूअधिग्रहण लॉ से बाहर करने का विरोध

विरोध प्रावधान का
नये कानून के बाद जो आर्थिक बोझ बढ़ेगा उसका केंद्रीय परियोजनाओं पर असर नहीं
किंतु एक साल के अंदर इन सभी परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण पूरा करना होगा
इस समय सीमा के बाद इस क्षेत्र के परियोजनाओं पर भी नया कानून ही लागू होगा

केंद्र की व्यवस्था, नए बिल का भार तुरंत न पड़े

मध्य प्रदेश सरकार ने नये भूमि अधिग्रहण कानून के दायरे से केन्द्र द्वारा संचालित प्रोजेक्टों को बाहर रखने पर कड़ी आपत्ति ली है। इस प्रावधान से केन्द्र ने ऐसी व्यवस्था कर ली है कि उस पर नये बिल का आर्थिक भार तुरंत न पड़े, किंतु राज्यों के बारे में कोई विचार नहीं किया। इसके चलते राज्यों पर तुरंत ही बड़ा आर्थिक बोझ आने वाला है।  

संसद द्वारा हाल में पारित भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन तथा पुनव्र्यवस्थापन अधिनियम 2013 के दायरे से राष्ट्रीय राजमार्ग, कोल माइन्स, मेटे, परमाणु ऊर्जा, रेलवे के प्रोजेक्टों को कुछ समय के लिए बाहर रखा गया है। इन क्षेत्रों के फिलहाल जो भी प्रोजेक्ट चल रहे है उन्हें जमीन अधिग्रहण पुराने कानून के आधार पर भी करने की अनुमति होगी।

इस तरह से नये कानून के बाद जो आर्थिक बोझ बढ़ेगा उसका इन प्रोजेक्टों पर कोई असर नहीं देखने को मिलेगा, किंतु एक साल के अंदर इन सभी प्रोजेक्टों में भूमि अधिग्रहण पूरा करना होगा। इस समय सीमा के बाद इस क्षेत्र के प्रोजेक्टों पर भी नया कानून ही लागू होगा। इसके पीछे केन्द्र सरकार का तर्क है कि ये सभी काम सार्वजनिक हितों के लिए किये जा रहे है, इसीलिये इनको फिलहाल दायरे से बाहर रखा गया है।

दूसरी ओर राज्यों द्वारा सार्वजनिक हित के लिए किये जा रहे कार्य इस कानून के दायरे में आयेंगे। इसी को लेकर मध्य प्रदेश सरकार की आपत्ति है। मध्य प्रदेश के वित्त और जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया ने बिजनेस भास्कर को बताया कि केन्द्र ने स्वयं को तो बड़े आर्थिक बोझ से बचा लिये किंतु राज्यों के बारे में इसमें कोई विचार नहीं किया। मध्य प्रदेश ने इस बारे में केन्द्रीय मंत्री को अवगत भी कराया था।

जो भी प्रोजेक्ट नये कानून के दायरे से बाहर किये गये है उसके पीछे सार्वजनिक हित का तर्क दिया जाता है, तो फिर राज्य सरकारें भी सिंचाई प्रोजेक्टों और राज्य मार्गों का निर्माण सार्वजनिक हिते के लिए ही करती है। इन दोनों को भी नये कानून के दायरे से बाहर किया जाना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि वैसे ही देश के कई राज्यों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, उस पर से बड़ा आर्थिक बोझ उन पर डालना उचित नहीं है।

बहुत संभव है कि राज्यों द्वारा सार्वजनिक हित के लिए किये जा रहे कार्यों की गति में कम हो जाये।  भोपाल प्रवास पर आये केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सुझाये गये संशोधनों के बारे में कहा कि सिंचाई प्रोजेक्टों में राहत देने के लिए ही जमीन के बदले जमीन की अनिवार्यता कुछ शर्तों के साथ हटाई गई है।