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खजाने की चिंता में बदली रणनीति, अब प्रोत्साहन राशि की घोषणा फसल आने के बाद

भोपाल। गेहूं, चना, मसूर, सरसों, प्याज, लहसुन और मूंग की फसल पर प्रोत्साहन राशि घोषित करने के बाद सरकार ने रणनीति में बदलाव किया है। अब फसल आने के बाद प्रोत्साहन राशि घोषित की जाएगी। बताया जा रहा है कि खजाने की स्थिति को देखते हुए इसकी घोषणा होगी। यही वजह है कि मूंग पर प्रोत्साहन राशि देने का खुलासा करने के बाद उड़द और धान की राशि का एलान रोक लिया गया है।

प्रदेश में भावांतर भुगतान योजना बंद होने के बाद सरकार चुनिंदा फसलों पर प्रोत्साहन राशि दे रही है। गेहूं के लिए 265 रुपए, चना, मसूर और सरसों में 100-100 रुपए, प्याज पर 400 और लहसुन उत्पादक किसानों को 800 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि की घोषणा हो चुकी है।

गर्मी की मूंग के लिए 800 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दी जाएगी पर उड़द की राशि अभी तक घोषित नहीं हुई है, जबकि मूंग और उड़द की खरीदी मंडियों में शुरू हो गई है। गेहूं की प्रोत्साहन राशि की घोषणा मुख्यमंत्री ने काफी पहले कर दी थी, लेकिन धान को लेकर अभी तक सुगबुगाहट ही शुरू नहीं हुई है। सोयाबीन को लेकर भी चुप्पी साध ली गई है। बताया जा रहा है कि सोयाबीन का रकबा इस बार 50 लाख हेक्टेयर को पार कर सकता है, जबकि धान की बोवनी 20 लाख हेक्टेयर में हो सकती है।

सूत्रों का कहना है कि काफी पहले से प्रोत्साहन राशि घोषित कर देने से इसका असर बाजार पर पड़ता है। व्यापारी प्रोत्साहन राशि मिलने की गारंटी को देखते हुए भाव उतना कम कर देते हैं। इसका नुकसान किसान को उठाना पड़ता है, इसलिए तय किया गया है कि फसल आने के नजदीक या फिर खरीदी शुरू होने के समय प्रोत्साहन राशि घोषित की जाएगी।

वैसे धान के लिए मुख्यमंत्री किसान महासम्मेलन में गेहूं जैसे ही 265 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि देने की बात कह चुके हैं। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि करने से सरकार भी निश्चिंत हो गई है कि किसान को अच्छे भाव मिलेंगे। वहीं, सरकार की वित्तीय स्थिति भी ठीक नहीं है। अध्यापकों के संविलियन के कारण करीब 26 सौ करोड़ रुपए का वित्तीय भार सरकार के ऊपर आने वाला है।