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घटते भूजल के कारण राजस्थान के किसानों के लिए सोलर पंप का इस्तेमाल कर पाना हुआ मुश्किल

मोंगाबे हिंदी, 3 नवम्बर 

इस साल जून में जैसे ही तापमान बढ़ा, राजस्थान के झुंझुनू जिले के बदनगढ़ गांव में रहने वाले 69 साल के किसान जमन सिंह सैनी की मुसीबतें भी बढ़ने लगीं थीं। वह अपने 31 एकड़ के बाजरा खेत की सिंचाई एक इलेक्ट्रिक पंप से करने की कोशिशों में लगे थे। उनके सामने कई चुनौतियां थीं, मसलन अनियमित बिजली की आपूर्ति, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और उससे जुड़े खर्चे।

हालांकि तकरीबन 10 साल पहले, 2013 में सैनी ने एक सरकारी योजना के जरिए सोलर पंप का विकल्प चुनकर इन चुनौतियों से पार पाने का प्रयास किया था। उन्होंने 3.5 हॉर्सपावर (एचपी) का सौर वाटर पंप लगाने के लिए सब्सिडी के अलावा अपनी जेब से 1.2 लाख रुपये खर्च भी किया था। शुरुआत में सब अच्छा चल रहा था। लेकिन जब 2016 में, भूजल स्तर 400 फीट से नीचे गिर गया, तो सब्सिडी वाले सौर पंप ने काम करना बंद कर दिया। दरअसल इस वाटर पंप की परिचालन क्षमता काफी कम थी। यह सिर्फ 320 फीट (100 मीटर) की गहराई तक ही काम कर सकता था। जब उन्हें अपने वाटर पंप का कोई फायदा नहीं नजर आया तो सैनी ने सौर पैनल और पंप को बेचने का फैसला किया। अब वह सिंचाई के लिए बिजली से चलने वाले पंप पर निर्भर हैं।

सैनी की तरह इस इलाके में कई किसान हैं जिन्होंने पिछले कुछ सालों में अपने खेतों की सिंचाई के लिए में सौर पंपों की तरफ रुख किया है। लेकिन ज्यादातर किसानों के लिए यह काम नहीं कर रहा है। अरावली पर्वतमाला से निकलने वाली काटली नदी के पास के खेतों में कुछ सौर पंप काम कर रहे हैं। यहां आसानी से से पानी निकल पा रहा है क्योंकि भूजल स्तर 200 फीट तक है। लेकिन ज्यादातर जगहों पर, किसानों को सौर पंपों में निवेश करने के अपने फैसले पर पछतावा हो रहा है। 

35 साल के मनोज कुमार यहां से कुछ किलोमीटर दूर चैनपुरा गांव में खेती करते हैं। वह अपनी फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए बाड़ की मरम्मत करने में लगे था। उन्होंने मोंगाबे-इंडिया को बताया कि उन्होंने 60% सरकारी सब्सिडी के साथ प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के तहत नवंबर 2022 में सौर पंप लगाया था। उन्हें अपने खेत की सिंचाई के लिए एक स्थायी और प्रभावी समाधान की उम्मीद थी। लेकिन घटते भूजल के कारण, उनका भी सौर वाटर पंप अब बेकार हो चुका है। उन्होंने अब अपना सोलर पैनल बेच दिया है।

पूरी रपट- मोंगाबे हिंदी