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चाय बागान की महिला मजदूरों के लिए सर्पदंश बड़ा खतरा, हर साल होती हैं कई मौत

मोंगाबे हिंदी, 9 अक्टूबर

पाही भूमिज उस दिन को याद करके कांप उठती हैं। वह कहती हैं कि मौत से बच निकलने के लिए वह ऊपर वाले की शुक्रगुजार है।

भूमिज असम के शिवसागर जिले के एक गांव में रहती हैं। इस साल पांच मई को वह अपने गांव से सटे एक चाय बागान में काम करने गई। 16 साल की भूमिज को चाय के पत्ते तोड़ने के लिए अस्थायी रूप से काम पर ऱखा गया था। दोपहर में, जब वह चाय की पत्तियां तोड़ रही थी, तो उसे अपने टखने में दर्द महसूस हुआ। तभी उसकी नजर चाय के पौधों के नीचे घास पर रेंगते हुए एक मोनोकल्ड कोबरा (नाजा कौथिया) पर गई। भूमिज तुरंत समझ गई कि उसे सांप ने काट लिया है।

आनन-फानन में उसे घर ले जाया गया। शाम में भूमिज को शिवसागर जिले के डेमाउ मॉडल अस्पताल में भर्ती कर दिया गया।

अस्पताल के एनेस्थेसियोलॉजिस्ट सुरजीत गिरि ने कहा, “वह बेहोश थी और उसकी सांस बहुत धीरे चल रही थी। धड़कन भी सुनाई नहीं पड़ रही थी।” “अस्पताल में आईसीयू सुविधा नहीं होने से हम परेशान थे, लेकिन फिर भी हम उसे बचाने की पूरी कोशिश में लगे हुए थे। आखिर में एम्बु बैग हमारे काम आया।”

एम्बु बैग को बैग वाल्व मास्क (बीवीएम) भी कहा जाता है। यह हाथ में पकड़ने वाला उपकरण है जिसका इस्तमाल बहुत कम सांस लेने वाले रोगी में वेंटिलेशन देने के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल भूमिज के फेफड़ों को मैन्युअल रूप से फिर से काम करने लायक बनाने के लिए किया गया था, क्योंकि एंटीवेनम इंजेक्शन की जरूरी खुराक दी जा रही थी। कुछ मिनट बाद, उसकी दिल की धड़कन सामान्य हो गई और वह होश में आ गई। एंटीवेनम कुछ ही घंटों में कोबरा के जहर को बेअसर करने में सफल रहा। भूमिज को अगले दिन छुट्टी दे दी गई। उन्होंने मोंगाबे-इंडिया को बताया, “मैं उस भयानक दिन को याद नहीं करना चाहती, लेकिन मैं जीवित रहने के लिए (सबकी) आभारी हूं।”
पूरी रपट- मोंगाबे हिंदी