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छत्‍तीसगढ़ में सैप की मदद से अब क्लाइमेट चेंज पर रिसर्च

रायपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के स्पेशल असिस्टेंट प्रोग्राम (सैप) के तहत पंडित रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी के बायोलाइफ साइंस एवं केमिस्ट्री डिपार्टमेंट को दो करोड़ 53 लाख रुपए की राशि मिली है। केमिस्ट्री डिपार्टमेंट में इस राशि से अब क्लाइमेट चेंज को लेकर बड़े स्तर रिसर्च हो सकेंगे। इसके लिए लैब में हाइटेक उपकरण की खरीदी करनी होगी।

राज्य में बारिश और तापमान में लगातार हो रहे परिवर्तन के साथ-साथ प्रदूषण भी सबसे बड़ा मुद्दा है। लिहाजा लगातार ग्लोबल वार्मिंग की वजह से भी वातावरण गर्म हो रहा है। धान के कटोरे में इस तरह से क्लाइमेट के बदलते स्वरूप पर रिसर्च करने के लिए यूनिवर्सिटी की ओर से यूजीसी की सैप टीम के समक्ष जबरदस्त प्रेजन्टेशन दिया गया था। लिहाजा यूनिवर्सिटी की डिमांड पर केमिस्ट्री डिपार्टमेंट को फिलहाल 1 करोड़ 28 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं।

प्रस्ताव की अपेक्षा कम मिले पैसे

केमिस्ट्री डिपार्टमेंट की ओर से यूजीसी दिल्ली में प्रतिनिधिमंडल ने 2 करोड़ 10 लाख रुपए से अधिक खर्च का अनुमानित प्रस्ताव रखा था। इसमें करीब साठ फीसदी ही स्वीकृत किया गया है। केमिस्ट्री डिपार्टमेंट में प्रोफेसर डॉ. शम्स परवेज ने इंटरनेशनल लेवल पर एयर क्वालिटी को लेकर रिसर्च किए हैं और उनके स्टडी पेपर जनरल में भी प्रकाशित हो चुके हैं। क्लाइमेट चेंज को लेकर भी केमिस्ट्री प्रोफेसर्स की टीम बेहतर काम कर रही है।

नैनो केमिस्ट्री पर भी होगी पकड़

यूनिवर्सिटी के बायोलाइफ साइंस एवं केमिस्ट्री डिपार्टमेंट में अब लैब पहले से और अधिक हाइटेक होंगी। केमिस्ट्री डिपार्टमेंट में इन्वाइरनमेंटल पाथवे नैनो केमिस्ट्री पर भी रिसर्च हो सकेंगे। नैनो केमिस्ट्री के अंतर्गत वातावरण में मौजूद विभिन्न कणों को लेकर रिसर्च किया जा सकेगा। वहीं बायोलाइफ साइंस डिपार्टमेंट के लिए क्रोनोबायोलॉजी पढ़ाने के लिए 1 करोड़ 25 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं, इसके लिए विभाग की ओर से 2 करोड़ 5 लाख रुपए का खर्च अनुमानित कर यूजीसी के समक्ष प्रस्ताव दिया गया था।

राज्य के दूसरी यूनिवर्सिटीज भी लाभान्वित

कुछ महीने पहले ही राज्य की कई यूनिवर्सिटीज के डिपार्टमेंट की ओर से (यूजीसी) के स्पेशल असिस्टेंट प्रोग्राम (सैप) के समक्ष प्रस्ताव रखे गए थे। इसमें फ्रेश इंडक्शन एवं रिव्यू कमेटी ने देशभर की यूनिवर्सिटीज के प्रस्ताव पर प्रेजन्टेशन देखकर राशि स्वीकृत की है। रविवि के अलावा बिलासपुर यूनिवर्सिटी और इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ को भी करीब डेढ़ करोड़ रुपए तक की स्वीकृति मिली है।

इनका कहना है

यह बहुत ही खुशी की बात है कि (यूजीसी) के स्पेशल असिस्टेंट प्रोग्राम (सैप) के तहत रविवि के बायोलाइफ साइंस एवं केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रस्ताव पर रिसर्च के लिए पैसे मिले हैं। अब इन डिपार्टमेंट की लैब पहले से और अधिक हाइटेक हो जाएंगी।

- केके चंद्राकर, कुलसचिव, रविवि