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जोशीमठ भूधंसाव के मामले में केंद्र सरकार ने दिया गोलमोल जवाब

डाउन टू अर्थ, 1 अगस्त 

जोशीमठ भूधंसाव के मामले में सरकार से संसद में सवाल पूछा गया, लेकिन सरकार की ओर से केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने पुरानी बातें दोहरा दी। उन्होंने बताया कि भूधंसाव के बाद तपोवन-विष्णुगाड पन बिजली परियोजना और हेलंंग मारवाड़ी बाइपास का काम रोक दिया गया था। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि हेलंग बाइपास का काम बाद में शुरू कर दिया गया था।  

राज्यसभा में दिए गए एक लिखित जवाब में उन्होंने बताया कि साल 1976 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित मिश्रा समिति ने जोशीमठ में भूस्खलन और स्थानीय धंसाव की चेतावनी दी थी। उस समय 18 सदस्यीय समिति के सदस्य संगठनों के पास उपलब्ध विशेषज्ञता और संसाधनों के अनुसार विभिन्न दीर्घकालिक और अल्पकालिक उपाय सुझाए थे।

उनके मुताबिक, मिश्रा समिति की सिफारिशों पर उत्तराखंड सरकार द्वारा कार्रवाई की जानी बाकी है।

अपने जवाब में उन्होंने आपदा प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति का हवाला देते हुए कहा कि राहत वितरण और आपदा के कारण प्रभावित लोगों के पुनर्वास सहित आपदा प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी भी राज्य सरकार की है। केंद्र सरकार स्थापित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक वित्तीय और रसद सहायता प्रदान करती है। 

यहां यह खास बात है कि छह माह से अधिक समय बीतने के बाद भी उत्तराखंड सरकार कोई स्थायी सहायता प्रदान नहीं कर पाई है।
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