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जल संकट पर गुजरात में राजनीतिक माहौल गरमाया

अमदाबाद। गुजरात में विपक्षी दलों और गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने राज्य के कई इलाकों में पानी की कमी के मसले पर ‘निष्क्रियता\' और ‘कुप्रबंधन\' को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लेकिन गुजरात सरकार इस संकट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है कि उसने सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने की इजाजत नहीं दी और द्वार निर्माण रोक दिया। सरकार का दावा है कि यह इजाजत मिल जाने से नर्मदा नदी का जल सौराष्ट्र और कच्छ लाया जा सकता था।


मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में कहा था कि विपक्ष सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ने की इजाजत नहीं मिलने से गहराए जलसंकट को समझने में असमर्थ रहा है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 33वें स्थापना दिवस पर सभा को संबोधित करते हुए कहा था, ‘भाजपा सरदार सरोवर बांध के मसले पर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू करेगी।\' जबकि गुजरात कांग्रेस ने जलसंकट के मसले को लोगों तक ले जाने के लिए ‘जल अधिकार यात्रा\' शुरू की है ताकि सरकार पर तत्काल कदम उठाने के लिए दबाव बनाया जा सके। दस अप्रैल को द्वारका से शुरू होने वाली यह यात्रा नौ जिलों के 100 गांवों से होकर गुजरेगी और 21 अप्रैल को अंबाजी में खत्म होगी।


कांग्रेस की गुजरात इकाई के अध्यक्ष सिद्धार्थ पटेल ने ‘जल अधिकार यात्रा\' की घोषणा करते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘सौराष्ट्र में 202 जलाशयों में से 72 सूख गए हैं, 89 लगभग खाली हैं और अन्य 41 जलाशयों में जलस्तर क्षमता से 25 प्रतिशत गिर गया है।\' उन्होंने कहा, ‘हमारा मकसद उस भाजपा सरकार की निष्क्रियता और कुप्रबंधन के खिलाफ जनमत तैयार करना है जो राज्य के विकास के क्षेत्र में सबसे आगे होने का प्रचार कर रही है लेकिन यहां लोग पीने के पानी की मूलभूत आवश्यकता से भी वंचित हैं।\' गर्मियों के आगमन से जहां एक ओर उत्तरी गुजरात के भुज, दीसा और ईदर व अमदाबाद जैसे शहरों में तापमान अभी से 40 डिग्री सेल्यिसस के आस पास पहुंच गया हैं, वहीं दूसरी ओर विशेषकर पेय जल की कमी का संकट गहराता जा रहा है। राजकोट, अमरेली, जूनागढ़ और सुंदरनगर जैसे बड़े शहरों में भी जलसंकट बढ़ गया है।


राज्य सरकार ने 26 मार्च को विधानसभा में कहा था कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में पीने और सिंचाई के लिए पानी का गहरा संकट है। सरकार ने घोषणा की कि 10 जिलों के 4000 गांव जलसंकट झेल रहे हैं। राजस्व मंत्री आनंदी पटेल ने बताया था कि राज्य के 939 गांवों में जलसंकट है जबकि 2979 गांव इससे आंशिक रूप से प्रभावित हैं जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा में विपक्ष के नेता शंकरसिंह वाघेला ने कहा था,‘सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात इलाके के लोग जलसंकट से जूझ रहे हैं लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि केवल 939 गांवों में ही जलसंकट है। यह बहुत असंगत है। सरकार को पूरे राज्य में पानी की कमी की समस्या से निपटने के लिए विस्तृत कार्य योजना बनानी चाहिए।\' गुजरात परिवर्तन पार्टी (जीपीपी) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल ने भी जलसंकट को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। कांग्रेस और जीपीपी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि वह नर्मदा नहरों का निर्माण कार्य पूरा करने के प्रति गंभीर नहीं है जिनसे सूखाग्रस्त सौराष्ट्र इलाके में नदी का पानी ले जाया जा सकता है। गुजरात में कुछ गैर सरकारी संगठनों ने भी इस मसले पर सरकार की आलोचना की है। सर्वोदय मंडल और पीयूसीएल की गुजरात शाखा ने सोमवार को जनसुनवाई का आयोजन किया है जहां लोग अपनी जल समस्याएं रखेंगे।


वाघेला, केशुभाई पटेल, पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता, गुजरात विद्यापीठ के कुलपति सुदर्शन आयंगर और भाजपा के पूर्व विधायक कानू कलसारिया इस मसले पर सभा को संबोधित करेंगे। पीयूसीएल की गुजरात शाखा के महासचिव गौतम ठाकुर ने कहा,‘जनसुनवाई आयोजित करने का मकसद राज्य भर में जलसंकट के बारे में सरकार को संवेदनशील बनाना है।\'