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टिड्डी दल बने किसानों की मुसीबत

पाकिस्तान से आए टिड्डी दल ने लंबे समय से हिंदुस्तान के पश्चिमी सरहदी गांवों में डेरा डाल रखा है। सैकड़ों किसानों की हजारों एकड़ में खड़ी फसल इन टिड्डियों के निशाने पर हैं। किसानों में इनके खौफ का आलम ये है कि हिंदुस्तान के बॉर्डर इलाके में सनसनी मची हुई है। इनके हवाई आक्रमण से किसानों में कोहराम मचा हुआ है। दरअसल सीमा पार से हिंदुस्तान आए ये टिड्डी दल जहां भी जाते हैं, उस इलाके को वीरान बना देते हैं। लहलहाती फसलों को चट्ट कर जाते हैं। सामने जो कुछ भी हरा-भरा दिखता है, उसका नाम-ओ-निशान तक मिटा देते हैं, इसीलिए इनकी मौजूदगी से सरहदी गांवों में बसे किसान हलकान हैं, प्रशासन परेशान है और इनसे पार पाने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है।
 
इस टिड्डी दल के आक्रमण ने राजस्थान के सरहदी जिलों बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर के साथ ही जालोर और सिरोही में खड़ी फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। वहीं गुजरात के सरहदी इलाकों में भी फसलों को चौपट कर दिया है। प्रत्येक क्षेत्र में चाहे सिंचित भूमि हो या नहरी क्षेत्र, सभी तरफ टिड्डी दल किसानों के जी का जंजाल बने हुए हैं। वहीं, प्रशासन खड़ी फसलों पर छिडक़ाव करने से बच रहा है। इसी वजह से टिड्डियों के दल किसानों की फसल पर हावी हो रहे हैं। खेतों में जीरा, इसबगोल, सरसों, अरंडी और गेहूं की खड़ी फसल के ऊपर से टिड्डियों ने पत्तियों को चट्ट कर दिया है। प्रशासन व ग्रामीणों की मदद से टिड्डियों को नष्ट करने के लिए वाहनों से दवाई का छिडक़ाव जारी है, फिर भी टिड्डी दल कई गांवों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा चुके हैं। टिड्डी दल से प्रभावित किसान अपने स्तर पर फसलों को बचाने के लिए बर्तनों को बजाकर या शोर करके परंपरागत तरीकों से  उन्हें भगाने का काफी जतन कर रहे हैं, लेकिन सफल नहीं हो रहे हैं। कृषि अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी खेतों की तरफ रुख किया है, लेकिन समस्या विकराल बनी हुई है। हैरान करने वाली बात यह है कि जुलाई में मानसून के सीजन में पहुंचे इस टिड्डी दल ने जनवरी की भीषण सर्दी में भी अपना डेरा जमा रखा है। वयस्क टिड्डी का झुंड एक दिन में 150 किलोमीटर तक हवा के साथ उड़ सकता है।
 
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