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दुनिया भर में हर तीन में से एक बच्चा पानी की भारी कमी से जूझ रहा है: यूनिसेफ

डाउन टू अर्थ, 14 नवम्बर

जहां आज हम भारत में बाल दिवस का उत्सव मना रहे हैं, वहीं दुनिया भर में बच्चे अनेकों समस्याओं का सामना रहे हैं। यूनिसेफ की एक नई रिपोर्ट 'दि क्लाइमेट चेंज्ड चाइल्ड' के अनुसार, तीन में से एक बच्चा या दुनिया भर में 73.9 करोड़ लोग पानी की भारी कमी वाले क्षेत्रों में रहते हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण स्थिति के और भी भयावह होने का खतरा है।

इसके अलावा, पानी की घटती उपलब्धता और अपर्याप्त पेयजल तथा स्वच्छता सेवाओं का दोहरा बोझ चुनौती को बढ़ा रहा है, जिसने बच्चों को और भी अधिक खतरे में डाल दिया है।

कॉप 28 जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन से पहले जारी द क्लाइमेट चेंज्ड चाइल्ड नामक रिपोर्ट, पानी की असुरक्षा के कारण बच्चों को होने वाले खतरों पर प्रकाश डालती है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को महसूस करने के तरीकों में से एक है। यह दुनिया भर में  जल सुरक्षा के तीन स्तरों - पानी की कमी, पानी की कमी से होने वाले खतरे और पानी की कमी के कारण होने वाले तनाव के प्रभावों का विश्लेषण करती है।

रिपोर्ट, यूनिसेफ चिल्डर्न क्लाइमेट रिस्क (2021) को आगे बढ़ाते हुए, उन असंख्य अन्य तरीकों को भी रेखांकित करती है जिनसे बच्चों को जलवायु संकट के प्रभावों का खामियाजा भुगतना पड़ता है। जिसमें बीमारी, वायु प्रदूषण, सूखा और बाढ़ जैसी चरम मौसम की घटनाएं शामिल हैं।

गर्भधारण के क्षण से लेकर वयस्क होने तक, बच्चों के मस्तिष्क, फेफड़े, प्रतिरक्षा प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों का स्वास्थ्य और विकास उस वातावरण से प्रभावित होता है जिसमें वे बड़े होते हैं। उदाहरण के लिए, बच्चों के वयस्कों के मुकाबले वायु प्रदूषण से पीड़ित होने के आसार बहुत अधिक होते हैं। आम तौर पर, वे वयस्कों की तुलना में तेजी से सांस लेते हैं और उनके मस्तिष्क, फेफड़े और अन्य अंग अभी भी विकसित हो रहे होते हैं।

रिपोर्ट के हवाले से यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा कि, जलवायु परिवर्तन के परिणाम बच्चों के लिए विनाशकारी हैं। उनके शरीर और दिमाग पर प्रदूषित हवा, खराब पोषण और अत्यधिक गर्मी का बहुत भारी असर होता है।

न केवल उनकी दुनिया बदल रही है बल्कि जल स्रोत सूख रहे हैं और चरम मौसम की घटनाएं अधिक प्रबल और लगातार हो रही हैं। जिसके कारण बच्चों का स्वास्थ्य भी बदल रहा है क्योंकि जलवायु परिवर्तन उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। बच्चे बदलाव की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी जरूरतों को अक्सर हाशिए पर धकेल दिया जाता है।

रिपोर्ट के निष्कर्षों के मुताबिक, बच्चों का सबसे बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका और दक्षिण एशिया क्षेत्रों में उजागर होता है, जिसका अर्थ है कि वे सीमित जल संसाधनों और उच्च स्तर की मौसमी और अंतर-वार्षिक परिवर्तनशीलता, भूजल स्तर में गिरावट या सूखा पड़ने के खतरों वाले इलाकों में रहते हैं।

पूरी खबर- डाउन टू अर्थ