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दहेज प्रताड़ना के मामले में पति की हो सकती है तुरंत गिरफ्तारी : SC

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले (498 A) के मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया है। इसके तहत कहा गया है कि यदि पुलिस को लगता है, तो वह मामले में पति की तुरंत गिरफ्तारी कर सकती है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने अपने पुराने फैसले में संशोधन करते हुए कहा है कि शिकायतों के निपटारे के लिए परिवार कल्याण कमेटी की जरूरत नहीं है।


मामले में आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाते हुए कोर्ट ने कहा कि पीड़ित की सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है। कोर्ट ने आगे कहा कि आरोपी के पास अग्रिम जमानत का विकल्प खुला है। बता दें कि इसी साल अप्रैल माह में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।


गौरतलब है कि पिछले साल 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने अपने पुराने फैसले में कहा था कि आईपीसी की धारा-498 ए यानी दहेज प्रताड़ना के केस में सीधे गिरफ्तारी नहीं होगी। लेकिन इस फैसले के बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा था कि दहेज प्रताड़ना मामले में दिए फैसले में जो सेफगार्ड दिया गया है उससे वह सहमत नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दहेज प्रताड़ना मामले को देखने के लिए हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति बनाई जाए, जो शिकायत के पहलुओं पर जांच करें और समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही जरूरी हो तो गिरफ्तारी होनी चाहिए, उससे पहले नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना मामले में कानून के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर की थी और लीगल सर्विस अथॉरिटी से कहा है कि वह प्रत्येक जिले में परिवार कल्याण समिति का गठन करे। इसमें सिविल सोसायटी के लोग भी शामिल हों।