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देवास : रेवासागरों को यूएनए अवार्ड

देवास [मनीष वैद्य] देवास में जलसंरक्षण और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए शुरू किए गए नवाचारी रेवासागर तालाबों को देश और प्रदेश में पहले ही रोल मॉडल माना जा चुका है. लेकिन अब इससे भी आगे बढक़र खबर यह है कि अब रेवा सागर को नवाचारी जल संरचनाओं के लिए यूएनए अवार्ड मिला है.

देवास जिले में वर्ष 2006 में  तत्कालीन जिला कलेक्टर उमाकांत उमराव ने जिले में गिरते भूजल स्थल से निपटाने के लिए रेवा सागर की नवाचारी योजना को भागीरथ किसानों के साथ मिलकर प्रारंभ किया था. इसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने विशेष तौर पर यूएन-वाटर बेस्ट प्रेक्टीसेस अवार्ड दिया है. इसके लिए विश्व के 5 महाद्वीपों के 17 देशों से प्रतिस्पर्धा के बाद देवास जिले के काम को चुना गया है.

अब इस अवार्ड के बाद रेवा सागरों पर विशेष डाक्यूममेंटरी तैयार कर विश्वभर के देशों में भेजी जाएगी. यानी अब यह नवाचार दुनिया भर  के लिए रोल मॉडल बन गया है. पानी और खाद्य सुरक्षा विषय पर इस महत्सपूर्ण अवार्ड के लिए कई देशों के सरकारी विभाग और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने नामांकन कराया था. लेकिन मूल्यांकन और चयन समिति ने रेवा सागर को चुना.

समिति में मेक्सीको, चिली, कजाकिस्तान, अमेरिका और चीन के सदस्य थे. इसके अलावा समिति में यूनिसेफ, यूनेस्को तथा फूड एंड एग्री कलचर आर्गेनाइजेशन यूएन आदि के सदस्य भी शामिल थे.  इससे पहले जलसंरक्षण के लिए भागीरथ किसानों द्वारा बनाए रेवा सागर को 5 राष्ट्रीय अवार्ड भी मिल चुके हैं और इंग्लेड, आस्टे्रलिया, इटली, श्रीलंका, इथोपिया सहित एक दर्जन से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि भी जिले में रेवा सागरों को देख-परख चुके हैं.

अब तक करीब 25 हजार से ज्यादा लोगों ने इनका आंकलन किया है. वहीं विभिन्न मेनेजमेंट इंस्टीट्यूट, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, शोध छात्रों और विभिन्न सरकारों के प्रशासकीय अधिकारियों ने भी इनके सुखद परिणामों को आक्कलन किया है.  जिले में अब तक करीब 8 हजार छोटे-बड़े तालाब बन चुके हैं. इन्ही खेत तालाबों को रेवा सागर नाम दिया गया. इनसे 100 एकड़ क्षेत्र तक सिंचाई की जा रही है. अब तक जिले में इन तालाबों से करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता निर्मित हुई है और तेजी से जलस्तर भी बढ़ा है. वहीं गांवों में आर्थिक बदलाव भी साफ नजर आ रहा है. इससे भी बड़ा फायदा जिले के पारिस्थितिकी तंत्र में हुए हैं, जहां हरियाली और पर्यावरण सुधार के साथ पशु पक्षियों और वन्य प्राणियों की तादाद में बढ़ोतरी हुई है. यहां तक कि करीब 20 साल बाद इलाके में फिर से प्रवासी पक्षी जेसे साइबेरियन क्रेन दिखाई देने लगी हैं.

यह सम्मान देवास जिले के उन किसानों को समर्पित है, जिन्होंने इस प्रयोग के माध्यम से बड़ी हिम्मत दिखाई. यह न केवल देश प्रदेश अपितु पूरे विश्व के लिए अब रोल मॉडल के रूप में सामने आया है. रेवा सागर सबसे सस्ता, टिकाऊ और परंपरागत मॉडल है, जो पानी से खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण के समग्र संदर्भों से जुडी समस्याओं का समाधान करती है – उमाकांत उमराव तत्कालीन जिला कलेक्टर देवास (स्वास्थ्य सचिव मप्र शासन)