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धरती पर पानी क्या ख़त्म हो रहा है?

-बीबीसी,

कुछ महीनों पहले की बात है. ईरान में अभूतपूर्व सूखे और बारिश की कमी की वजह से नदियाँ सूख गईं. पूरे देश में पानी की कमी को लेकर भीषण विरोध प्रदर्शन हुए.

साल 2019 में भारत के सबसे बड़े शहरों में से एक चेन्नई का पानी संकट अख़बारों की सुर्खियां बना. उस वक़्त बहस छिड़ी कि बढ़े उद्योग, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन का असर किस तरह का कहर बरपा सकता है.

साल 2018 में भीषण सूखे की वजह से दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन शहर में प्रति व्यक्ति रोज़ाना पचास लीटर पानी सप्लाई की सीमा लागू की गई.

साल 2014 में ब्राज़ील के साओ पाओलो और ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में भी हालात कुछ ऐसे ही थे.

एक तरफ सूखा, तो एक तरफ बाढ़

जेम्स फैम्लिएटी सास्काचेवान यूनिवर्सिटी में ग्लोबल इंस्टीट्यूट फ़ॉर वाटर सिक्योरिटी के कार्यकारी निदेशक हैं. इससे पहले वो कैलिफोर्निया में नासा में वॉटर साइंटिस्ट रह चुके हैं.

कैलिफोर्निया के जंगलों में हर साल आग लगती है. लेकिन चौंकाने वाली बात ये है सब्ज़ियों और फलों के मामले में देश की ज़रूरत का एक तिहाई हिस्सा यहां उगाया जाता है.

जेम्स कहते हैं, "अगर हम खेती के लिए पानी की बात करें तो शायद दुनिया के सभी खेती वाले इलाक़ों की स्थिति कैलिफोर्निया जैसी होगी. वहां जो उगाया जाता है वो केवल वहां की ही नहीं बल्कि दूसरे इलाक़ों की ज़रूरतों को भी पूरा करता है. जबकि दूसरे इलाक़े खेती के लिए पानी की यहां की ज़रूरतों को पूरा नहीं करते. ये अन्सस्टेनबल तरीका है."

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