Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/धरती-कथा-डायरेक्ट-की-इनडायरेक्ट-मुश्किलें-13758.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | धरती कथा: डायरेक्ट की इनडायरेक्ट मुश्किलें | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

धरती कथा: डायरेक्ट की इनडायरेक्ट मुश्किलें

-आउटलुक हिंदी
 
“खाद्य महंगाई दर दहाई अंकों में चली गई है। उपभोक्ता हित के लिए घरेलू किसानों की कीमत पर सस्ते आयात का रास्ता फिर खोला जा सकता है”
डायरेक्ट यानी प्रत्यक्ष का रास्ता कई इनडायरेक्ट यानी अप्रत्यक्ष दिक्कतें लेकर आता है। यह बात कृषि क्षेत्र और किसानों के मामले में काफी हद तक लागू होती है। मसलन, सरकार को पता है कि दूध, गन्ना, आलू और प्याज जैसी फसल उगाने वाले किसानों के मुकाबले इनके उपभोक्ता ज्यादा हैं यानी वोट भी ज्यादा हैं। इसलिए अक्सर इन फसलों की कीमतों पर अंकुश लगाने की कोशिशें सरकारें लगातार करती रही हैं। सारा मामला वोट का जो है। इसे पॉलिटिकल इकोनॉमी भी कह सकते हैं। लेकिन कभी-कभी यह दांव उल्टा पड़ जाता है। हाल के एक दशक में तो दो सरकारों को इस कड़वे सच से जूझना भी पड़ा है। कांग्रेस की मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए-दो सरकार को महंगाई की मार झेलनी पड़ी थी। राजनैतिक स्तर पर भ्रष्टाचार और नीतिगत पंगुता के आरोप झेलती सरकार को खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई पर नियंत्रण न रख पाने का खामियाजा भुगतना पड़ा था।

अब बात मौजूदा मोदी-दो सरकार की। पहली सरकार के दौरान स्थितियां उसके लिए कुछ अच्छी थीं। खाद्य महंगाई दर नियंत्रण में थी लेकिन इसके साथ ही किसानों की वित्तीय स्थिति भी खराब होती गई क्योंकि उनकी उपज के दाम काफी कम रहे या पहले से काफी गिर गए। ऐसे में सरकार के पास तेल की कीमतों के कम होने के चलते राजस्व भी काफी आ रहा था। नतीजा किसानों की कम चिंता करके तमाम तरह की लोक-लुभावन योजनाएं चलाई गईं और खर्च का आवंटन किया गया। उसी में ‘उज्‍ज्वला’ से लेकर ‘सौभाग्य’ और ‘ग्रामीण आवास’ से लेकर ‘स्वच्छ भारत’ जैसी योजनाएं परवान चढ़ीं। लेकिन अब मामला थोड़ा मुश्किल हो गया है। खाद्य महंगाई दर दहाई में चली गई है और आने वाले कुछ माह में काबू में आने की संभावना न के बराबर है। बात दूध की हो, प्याज की हो, आलू की हो या चीनी की, सभी की कीमतों में ऊपर का रुख है। इसके लिए विश्व बाजार में भी जाएंगे तो वहां भी सस्ती दर नहीं मिलेगी। यह बात अलग है कि एक बार फिर घरेलू किसानों के हितों की कीमत पर उपभोक्ताओं के हितों के लिए सीमा शुल्क में कटौती कर कुछ कृषि और डेयरी उत्पादों के सस्ते आयात का रास्ता खोलने की कोशिश हो सकती है। जहां तक राजकोषीय मोर्चे की बात है तो वहां हाथ सिकुड़ रहा है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें तो 70 डॉलर के आसपास ही रहने के आसार हैं, इसलिए वहां से अतिरिक्त राजस्व के बजाय महंगाई बढ़ाने वाले कारक जरूर जुड़ सकते हैं। इसलिए जो प्रत्यक्ष नहीं है, वह भी राजनैतिक रूप से कुछ दिक्कतें पैदा कर सकता है।
 
पूरा लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.