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नर्मदा नदी में अवैध रेत खनन की जांच करेगी एसआईटी

भोपाल (नप्र)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नर्मदा नदी में अवैध रेत खनन की जांच के लिए पांच सदस्यीय एसआईटी गठित की है। इसमें नरसिंहपुर कलेक्टर, एसपी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर, डीएफओ और जिला खनिज अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। इसी के साथ एनजीटी ने नरसिंहपुर जिले में नर्मदा के घाटों पर रेत खनन की स्थिति पर एसआईटी से 10 दिन में रिपोर्ट भी मांगी है।

 

यह फैसला सोमवार को पर्यावरण कार्यकर्ता विनायक परिहार की याचिका पर दिया गया है। इसके लिए एनजीटी ने नवदुनिया समेत स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित अवैध खनन का खुलासा करने वाली खबरों को आधार बनाया। याचिका में प्रेस रिपोर्ट के साथ नरसिंहपुर जिले में घाट पिपरिया, रामघाट और सुमनघाट समेत 20 स्थानों से भारी मात्रा में पोकलेन मशीन, पनडुब्बी खनन मशीनों से नदी की बीच धारा से रेत खोदे जाने के फोटोग्राफ एनजीटी के सामने पेश किए गए थे।


इस मामले में एनटीजी ने गत शुक्रवार को हुई सुनवाई पर अधिवक्ता श्रेयस धर्माधिकारी को मामले की जांच के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया था, लेकिन धर्माधिकारी ने प्रतिवादी पक्ष की ओर से पैरोकार होने के कारण जांच से इनकार कर दिया था। इसके बाद एनजीटी ने जांच के लिए एसआईटी गठित करने का फैसला लिया। अब एसआईटी को 20 मई तक अपनी रिपोर्ट एनजीटी को देनी होगी। मामले में अगली सुनवाई 23 मई को होगी।


सरकार से पूछा- क्या संभव है रेत की सेंट्रलाइज मार्केटिंग


एनजीटी ने रेत के अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए प्रभावी नीति बनाने पर राज्य सरकार से भी 23 मई तक जवाब-तलब किया है। एनजीटी ने राज्य शासन और एमपी स्टेट माइननिंग कॉर्पोरेशन को नोटिस जारी कर पूछा कि क्या प्रदेशभर में रेत के निजी स्तर पर विक्रय को प्रतिबंधित कर सरकारी नियंत्रण में सेंट्रलाइज मार्केटिंग की जा सकती है?


एनजीटी ने पूछा है कि क्या ऐसा संभव है कि सभी लीज होल्डर खननकर्ता अपनी रेत माइनिंग कॉर्पोरेशन को सप्लाई करें और इस रेत का आधिकारिक विक्रय सरकारी रेट पर माइनिंग कार्पोरेशन के द्वारा बिल्डर, आम ग्राहक और कंस्ट्रक्शन कंपनियों को किया जाए। क्या ऐसी व्यवस्था बनाने से रेत के अवैध खनन और परिवहन रोका जा सकता है?