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निजी नलकूपों ने लगाया भूजल स्तर को ग्रहण

भोपाल। गर्मी के आते ही शहर में पानी की किल्लत शुरू हो गई है और नगर निगम मुख्यालय में अधिकारी अभी जल संकट से निपटने की योजना भी नहीं बना पाए हैं। करोद जैसी घनी आबादी में पानी की खरीदी बिक्री का खेल शुरू हो गया है। शहर में बढ़ते नलकूपों के खनन ने भूजल स्तर को ऐसा ग्रहण लगाया है कि कई बस्तियों में पानी के लिए हाहाकार की स्थिति बन रही है। जानकारी के मुताबिक गर्मी की शुरूआत हो गई है और नगर निगम के लगभग सात सौ हैंड पंप सूख गए हैं या खराब पडे़ हैं। हर साल शहर में नलकूपों की संख्या में 800 का इजाफा हो रहा है।

राजधानी की आबादी को पानी देने के लिए बड़ी झील के साथ कोलार का जल स्त्रोत भी कार्य कर रहा है। नगर निगम के पास 1800 हैंड पंप हैं और 1400 नलकूप भी कुछ चिन्हित हिस्सों में जल प्रदाय करते हैं। इसके अलावा कुएं और बावड़ी भी लोगों को जल प्रदाय का कार्य कर रही हैं। चिंता की बात यह है कि भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। चार से पांच सौ फीट की गहराई पर लगे नलकूप दम तोड़ने की कगार पर हैं। इनमें करोद के अलावा लालघाटी और सेमरा जैसी आबादी शामिल हैं। नगर निगम का अनुमान है कि शहर में 20-22 हजार के आसपास घरों में नलकूप कार्य कर रहे हैं। और इस बार इनकी संख्या में 800 से अधिक का इजाफा हुआ है। सबसे अधिक नलकूपों का खनन उन्हीं क्षेत्रों में हुआ जहां कि नगर निगम जल प्रदाय नहीं कर सका। इनमें करोद व सेमरा के क्षेत्र शामिल हैं। सेमरा निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि उसने लगभग ढाई सौ फिट की गहराई तक नलकूप पिछले साल खुदवाया था जो मार्च के आते ही दम तोड़ गया। अब बामुश्किल पांच गैलन कीचड़ युक्त पानी मिल रहा है। इसी तरह से करोद के पंकज यादव का कहना है कि उनके क्षेत्र में भी नलकूप दमतोड़ चुके हैं। जिससे कि निजी जल सेवाओं के लिए चांदी काटने का मौसम आ गया है। राजधानी की तीस फीसदी आबादी को बड़ी झील से पानी मिलता है और सत्तर फीसदी आबादी को कोलार से जल प्रदाय किया जाता है। नगर निगम के इन आंकड़ों की सच्चाई से दूर दस फीसदी लोग ऐसे हैं जिन्होंने नलकूप लगा रखे हैं और गिरते भूजल स्तर की वजह से परेशानी का सामना भी उन्हीं को करना पड़ रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि शहर में बढ़ती पानी की समस्या के बावजूद भूजल स्तर में ग्रहण लगाने वाले नलकूप खनन के लिए नगर निगम की स्वीकृति लोगों को आसानी से मिल जाती है।

महापौर कर रही जल संकट की समीक्षा

नगर निगम मुख्यालय में भी गर्मी के दौरान जल संकट से निपटने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अफसर चाहे कुछ न भी करें लेकिन महापौर कृष्णा गौर इस बात को लेकर चिंतित है और उन्होंने जोनवार स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। 11 मार्च को उन्होंने एक से लेकर पांच नंबर जोन तक की समीक्षा की और अब सोमवार व मंगलवार को समीक्षा की जाएगी।

15 अप्रैल से नियमित जल प्रदाय

नगर निगम सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आगामी 15 अप्रैल से शहर में नियमित जल प्रदाय की योजना तैयार की जा रही है। महापौर कृष्णा गौर चाहती हैं कि गर्मी के दौरान लोगों को पानी की समस्या का सामना न करना पड़े। सूत्रों का यह भी कहना है कि अफसर इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। उनका मानना है कि जब दो दिन में एक बार पानी की आदत पड़ चुकी है तब नियमित जल प्रदाय उचित नहीं है। रोचक बात यह है कि पूर्व महापौर सुनील सूद के नेतृत्व में तत्कालीन एमआईसी सदस्यों ने एक जनवरी से नियमित जल प्रदाय का संकल्प मंजूर किया था। जिसे अधिकारियों ने ताक पर रख दिया।

कहां कितना पानी

बड़ी झील - 1660.80 फीट

कोलार 456 मीटर

अन्य स्त्रोत 1400 नलकूप

400 बंद पड़े हैं

हैंड पंप 1800

दम तोड़ गए 700

कुआ बावड़ी 45

वर्तमान समय की स्थिति

कोलार 34 एमजीडी पानी

बड़ी झील 7 एमजीडी पानी

अतिरिक्त स्त्रोत 2 एमजीडी पानी

नियमित जल प्रदाय के लिए आकलन किया जा रहा है। वर्तमान स्थिति में नियमित जल प्रदाय तभी संभव है जब बारिश से पहले बड़ी झील का जल स्तर डेड स्टोरेज से ऊपर रहने की संभावना हो। यदि संभव हुआ तो 15 अप्रैल या 1 मई से नियमित जल प्रदाय करने का प्रयास करेंगे।

कृष्णा गौर, महापौर

गर्मी में लोगों को नियमित जल प्रदाय किया जाना चाहिए। बारिश के बाद व्यवस्था पूर्ववत हो सकती है।

मो. सरवर, पूर्व एमआईसी सदस्य जलकार्य विभाग