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पंजाबी के राशन कार्ड की ट्रांसलेशन बनी समस्या

जालंधर. प्रशासकीय सुधारों के तहत राशन कार्ड बनाने का काम सुविधा सेंटर में किया जा रहा है। बावजूद राशन कार्ड जारी करने में एक महीना लग रहा है। पंजाबी में बने राशन कार्ड अलग से मुसीबत बन रहे हैं। इसका कारण विदेशी एंबेसी इनकी अनुवादित प्रतियां मांग रही है।

राशन मिले या न मिले, लेकिन राशन कार्ड सबको चाहिए। वजह, इसके आधार पर पासपोर्ट से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस और रेजिडेंस सर्टिफिकेट तक बनेगा। जब राशन कार्ड आपके पास हो। विदेश का वीजा अप्लाई करने के लिए शिनाख्त दस्तावेज भी राशन कार्ड ही है। इसके चलते, इसे बनवाने वालों की रोजाना लाइन लगती है। रोजाना 100 से अधिक आवेदन आते हैं।

सुविधा सेंटर के अधिकारी बताते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड न करने के कारण ही काम में देरी हो रही है। राशन कार्ड तैयार करने तथा फूड सप्लाई विभाग की मुहर लगवाने में ही बीस दिन लग जाते हैं। दूसरी समस्या यह है कि सरकार की तरफ से राशन कार्ड पर पंजाबी भाषा में ही आवेदक का नाम व पारिवारिक जानकारी भरने के आदेश हैं। जबकि पंजाब से बाहर दस्तावेज की प्रति भेजनी हो तो इसका अंग्रेजी अनुवाद कराना पड़ता है। इससे उन्हें दोहरा काम करना पड़ रहा है।

ये है जनता की मुसीबत

नकोदर के चरणजीत बंगड़ का बेटा विदेश में है। दूतावास में प्रयोग के लिए कोई भी शिनाख्त दस्तावेज चाहिए। इसके लिए उन्होंने राशन कार्ड प्रस्तुत किया। अब ये कार्ड पंजाबी में था। बंगड़ बताते हैं कि उन्हें राशन कार्ड का अंग्रेजी अनुवाद कराना पड़ा। उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं, इसके लिए डीसी आफिस में कई क्लर्को से पूछताछ करनी पड़ी। फिर जाकर सुविधा सेंटर पहुंचे हैं। यहां आकर फार्म भरा, डीसी के हस्ताक्षर करवाने होंगे। पंद्रह दिन बाद उन्हें हस्ताक्षरित दस्तावेज मिलेगा। इस काम के लिए उन्हें नकोदर से कई बार जालंधर शहर आना पड़ा।


राशन कार्ड बनाने में लगते हैं 25 दिन

नया राशन कार्ड बनवाने में 25 दिन लगते हैं। पेशे से दुकानदार हरजोत सिंह सुविधा सेंटर में मिले। उन्होंने कहा कि वह आर्थिक रूप से इतने संपन्न हैं कि राशन डिपो से सस्ता अनाज लेने की जरूरत नहीं। फिर भी राशन कार्ड बनवा रहे हैं। वजह यह है कि बेटे ने कैनेडा जाने के लिए वीजा आवेदन देना है। राशन कार्ड शिनाख्ती दस्तावेज के रूप में पेश होगा। उन्हें राशन कार्ड बनाने के लिए लंबी प्रक्रिया अपनानी पड़ी। सबसे पहले डीसी ऑफिस से फार्म लिया। फिर उस पर इलाका पार्षद की मुहर लगवाने गए। लौटे हैं तो आवेदन फाइल जमा हुई। रसीद के मुताबिक उन्हें तैयार राशन कार्ड 29 जून को मिलेगा। ये बहुत लंबी प्रक्रिया है।

सरकार के लिए सुझाव


एडवोकेट अशोक शर्मा कहते हैं कि प्रशासकीय सुधारों के पहले चरण में आवेदन प्रक्रिया सरल करने की कोशिश की गई। इसमें राशन कार्ड भी शामिल है। जरूरत इस बात की है कि हर नागरिक को राशन कार्ड बनाने के लिए बाध्य न किया जाए। जिन्हें इसकी जरूरत है, वो आवेदन फार्म भरकर डिपो होल्डर को दें। उसी की जिम्मेदारी फूड सप्लाई विभाग से तस्दीक कराने की हो। पंजाब सरकार शिनाख्त दस्तावेज के रूप में अलग कार्ड जारी करे। आधार कार्ड परियोजना बंद होने के बाद फिर से राशन कार्ड पर निर्भरता बढ़ गई है। राशन कार्ड पर दर्ज आवेदन की जानकारी को दूसरे पेज पर अंग्रेजी में भी लिखा जाए। इससे लोगों को अनुवाद की समस्या से निजात मिलेगी।