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फसल अवशेषों के अनुमान के साथ आसान हो सकेगा बायो ऊर्जा उत्पादन: रिपोर्ट

मोंगाबे हिंदी. 7 अगस्त

हाल ही मे हुए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि फसलों के अवशेषों से बायो ऊर्जा का उत्पादन करने की भारत की क्षमता पहले के अनुमान से कम है। यह सालाना 1313 पेटाजूल्स (PJ) (1 PJ = 277778 मेगावाट) बायोएनर्जी बनाने की क्षमता का सुझाव देता है, जो 1738 से 4150 PJ तक के पहले के अनुमान से कम है। हालांकि, अध्ययन जिले और अलग-अलग फसलों की बायो-ऊर्जा क्षमता से जुड़े जरूरी आंकड़े देता है, जो देश को बेहतर योजना बनाने और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करने में मदद कर सकता है।

यह अध्ययन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) की मदद से किया गया है। भारत भर में किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि चावल, गेहूं, गन्ना, मक्का, बाजरा, मूंगफली, तिलहन, कपास और केला जैसी फसलों के अवशेषों को जलाया जाता है। ये अवशेष कटाई के बाद  बचे हुए पदार्थ होते हैं। अध्ययन से पता चलता है कि फसल के अवशेषों को जलाना, इनसे निपटने का आसान और कम लागत वाला तरीका है। हालांकि, फसल अवशेष जलाने से हानिकारक गैसें निकलती हैं। लेकिन इनसे बायो ऊर्जा बनाई जा सकती है। 
पूरी रिपोर्ट- मोंगाबे हिंदी