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फाइलों में उलझी सवा दो लाख किसानों के फायदे की ग्रीन इंडिया योजना

वैभव श्रीधर, भोपाल। सवा दो लाख से ज्यादा किसानों के सीधे फायदे से जुड़ी ग्रीन इंडिया योजना दो विभागों के बीच फाइलों में उलझ गई है। ग्रामीण विकास व उद्यानिकी विभाग ढाई माह में तय ही नहीं कर पाए कि योजना को किस रूप में चलाना है, जबकि केंद्र सरकार स्पष्ट मार्गदर्शन तक दे चुकी है। ऊहापोह की स्थिति को देखते हुए राजगढ़, विदिशा सहित अन्य जिलों ने करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट निरस्त कर दिए। हालात ये हैं कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव नोटशीट लिखकर भ्रम की स्थिति को दूर करने के निर्देश दे चुके हैं पर निराकरण नहीं हो पाया।

ये है मामला

प्रदेश में तीन मार्च 2015 को ग्रीन इंडिया योजना सभी जिलों में लागू की गई। इसका मकसद फूल और फलदार पौधों को लगवाकर किसानों की परंपरागत खेती पर निर्भरता को कम करना था। इसके लिए प्रदेशभर में 2 लाख 21 हजार 231 किसानों का चयन किया गया। लक्ष्य था कि एक साल में 15 हजार 404 हेक्टेयर में पांच करोड़ से ज्यादा पौधों का रोपण हो जाए, लेकिन योजना 25 हजार किसानों तक पहुंची और 50 लाख पौधे ही लग सके थे कि राज्य रोजगार गारंटी परिषद ने सामग्री मद की राशि इसमें लगाने पर 20 अक्टूबर को रोक लगा दी और योजना जहां की तहां ठहर गई। जिलों को निर्देश दिए गए कि इस मद में राशि खर्च की तो वसूली होगी।

परिषद का कहना था कि योजना में सब्जी और अनाज की खेती करने की मनाही है, इसलिए मजदूरी के अलावा किसी और मद में राशि खर्च नहीं की जा सकती है। दरअसल इसमें गड्ढे खोदने से लेकर पौध्ो, खाद, कीटनाशक आदि का खर्च मनरेगा से होना था। इस पर असमंजस की स्थिति को देखते हुए परिषद ने केंद्र सरकार से मार्गदर्शन भी लिया तो पुरानी योजना को सही ठहराया गया। इसके बाद भी परिषद ने लगाई रोक अब तक नहीं हटाई है। उधर मंत्रालय में इसको लेकर फाइल अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास, कृष्ाि उत्पादन आयुक्त, उद्यानिकी विभाग और मनरेगा दफ्तर में घूम रही है।

अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास अरुणा शर्मा का कहना है कि एक बिन्दु पर भ्रम को लेकर ये स्थिति पैदा हुई थी। अब केंद्र सरकार ने स्थितियां साफ कर दी हैं।

बदलाव चाहते हैं अधिकारी- सूत्रों का कहना है कि योजना इतनी विवादास्पद हो चुकी है कि परिषद के अध्ािकारी इसके हर बिन्दु का परीक्षण कर बदलाव करना चाहते हैं। दरअसल, किसानों को योजना में 25 प्रतिशत हिस्सा लगाना है लेकिन ये किस रूप में हो, इसको लेकर तस्वीर साफ नहीं है। इसी तरह यदि किसान गोबर की खाद का इस्तेमाल करता है तो उसे भुगतान कैसे और किस हिसाब से होगा। प्रमुख सचिव उद्यानिकी अशोक बर्णवाल का कहना है कि पौध्ारोपण की तैयारी मार्च-अप्रैल में होती है। इसके पहले सभी भ्रमपूर्ण स्थितियों का समाध्ाान हो जाएगा।

बुंदेला की सजा माफ- योजना में सामग्री मद की राशि के इस्तेमाल पर रोक लगाने का विरोध्ा करने वाले स्टेट नोडल अधिकारी एमपीएस बुंदेला की सेवाएं राज्य रोजगार गारंटी परिषद ने उद्यानिकी विभाग को लौटा दी है। बुंदेला को मिली 15 दिन का वेतन काटे जाने की सजा अपील में अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास ने माफ कर दी है।