Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/ब-बर-मस-ज-द-व-ध-व-स-स-प-र-म-क-र-ट-और-स-ब-आई-अद-लत-क-र-य-ब-ल-क-ल-अलग-क-स-ह-गई.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | बाबरी मस्जिद विध्वंस: सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई अदालत की राय बिल्कुल अलग कैसे हो गई? | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

बाबरी मस्जिद विध्वंस: सुप्रीम कोर्ट और सीबीआई अदालत की राय बिल्कुल अलग कैसे हो गई?

-बीबीसी,

भारतीय सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों वाली संवैधानिक खंडपीठ ने नवम्बर माह में अपने फ़ैसले में साफ़ तौर पर कहा था कि बाबरी मस्जिद को गिराया जाना एक "ग़ैर क़ानूनी" कृत्य था.

सुप्रीम कोर्ट खंडपीठ का नेतृत्व ख़ुद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश कर रहे थे. लेकिन क्या कारण रहा कि सीबीआई की विशेष अदालत को बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अभियुक्त बनाए गए लोगों क ख़िलाफ़ साक्ष्य नहीं नज़र आए और सभी को बरी कर दिया गया?

इस बारे में क़ानूनविदों और वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि जो फ़ैसला सीबीआई की विशेष अदालत ने दिया और जो पिछले साल सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक खंडपीठ ने दिया, दोनों में काफ़ी विरोधाभास है.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील ज़फ़रयाब जिलानी ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि जो लोग सीबीआई के निचली अदालत में बतौर गवाह पेश हुए और उन्होंने अपना पक्ष अदालत के सामने रखा लेकिन आश्चर्य है कि अदालत ने उनकी गवाही का कोई संज्ञान ही नहीं लिया.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर मुसलमान पक्ष के वकील नाखुश

850 गवाहों के बयान, फिर भी कुछ साबित नहीं हुआ
बाबरी मस्जिद के गिराए जाने के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत में कुल 850 गवाहों के बयान दर्ज हुए थे.

जिलानी का कहना है कि अदालत ने फ़ैसला सुनाने से पहले न तो 6 दिसंबर 1992 की घटना से सम्बंधित अखबारों और पत्रिकाओं में छपी रिपोर्टों को ही संज्ञान में लिया, न तस्वीरों को और न ही विडियो को, जबकि ये सब कुछ अब 'पब्लिक डोमेन' यानी सार्वजनिक है.

उस समय अभियुक्तों की भूमिका बाबरी मस्जिद के तोड़े जाने में क्या थी ये भी सार्वजनिक ही है.

वो कहते हैं, "वो वीडियो भी इंटरनेट पर अब मौजूद हैं जिनमें भारतीय जाता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद् और दूसरे हिंदू संगठन के नेता कारसेवकों को मस्जिद तोड़ने के लिए उकसाते हुए साफ़ दिख रहे हैं. उसमें कुछ नेताओं को माइक से घोषणा करते हुए साफ़ देखा जा सकता है जिनमें वो कह रहे हैं-एक धक्का और दो, बाबरी मस्जिद तोड़ दो."

जिलानी ने इसपर भी आश्चर्य व्यक्त किया कि सार्वजनिक तौर पर मौजूद सबूतों को कोई अदालत कैसे अनदेखा कर सकती है?

'भड़काऊ नारे, हथियारों से लैस कारसेवक'

उनका तर्क है कि जिनकी गवाही अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज हैं वो उस वक़्त अयोध्या में तैनात वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं. इसके अलावा जो उस वक़्त ये पूरा माजरा रिपोर्ट कर रहे थे वो पत्रकार भी गवाह हैं.

वो कहते हैं, "इन गवाहों ने जो बयान दिए, उन पर अदालत ने भरोसा नहीं किया. फ़ैसला बताता है कि अदालत ने गवाहों की बात को तरजीह नहीं दी. तो क्या ये सभी गवाह झूठ बोल रहे थे? अगर ऐसा है तो फिर अदालत न इन सब पर क़ानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की?"

हैदराबाद स्थित नालसार लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर फ़ैज़ान मुस्तफ़ा ने बीबीसी संवाददाता दीप्ति बाथिनी से बातचीत में सीबीआई की विशेष अदालत के फ़ैसले को "निराशाजनक" बताया और कहा कि ये भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली के लिए एक धक्का है.

उन्होंने कहा, "बीजेपी और शिवसेना के नेताओं के उस व़क्त के भाषण उपलब्ध हैं. तब जो धर्म संसद आयोजित हो रही थीं, उनमें दिए नारे देखे जा सकते हैं. जो कार सेवक उस दिन आए थे,वो कुल्हाड़ी, फावड़ों और रस्सियों से लैस थे. इससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि ये षड्यंत्र था."

पूरी रपट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.