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बंद हो जाएगा आरटीओ दफ्तरों में फर्जीवाड़ा

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। दस साल पहले शुरू हुई क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों [आरटीओ] के कंप्यूटरीकरण की परियोजना अब इस साल जुलाई में पूरी होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार की मानें तो राज्य सरकारों की हीला हवाली से यह परियोजना अटकी रही है। परंतु अब सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की सख्ती से इस पर काम तेज हुआ है।

सरकार ने आरटीओ कार्यालयों में धड़ल्ले से चल रहे फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए देश भर में फैले सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों [आरटीओ] का कंप्यूटरीकरण करने और उन्हें आपस में जोड़ने की योजना 1999-2000 में बनाई थी। इसे 2007 तक पूरा करने का लक्ष्य था। मकसद था आरटीओ में सक्रिय बिचौलियों की भूमिका खत्म करना और एक राज्य से दूसरे राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट व वाहनों के पंजीकरण से संबंधित रिकार्डो को खंगालने की सुविधा देकर संपूर्ण प्रणाली को पारदर्शी बनाना। परंतु योजना आज तक अधूरी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लागू नहीं होने से देश में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ रहा है, जबकि वाहन चोरी, रोड टैक्स तथा चोरी के वाहनों से अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। लोग दुर्घटना के बाद किसी दूसरे राज्य से ड्राइविंग लाइसेंस [डीएल] बनवाकर फिर सड़कों पर वाहन चलाते है।

विश्व में सड़क दुर्घटनाओं के मामले में भारत को अव्वल मुकाम हासिल है। एक साल में औसतन एक लाख से ज्यादा लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कुछ महीने पहले सड़क सुरक्षा बोर्डो के गठन का विधेयक पारित किया है और अब बोर्डो के गठन की प्रक्रिया चल रही है।

इस बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री कमलनाथ ने वर्ष 2012 तक सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या घटाकर आधी करने का लक्ष्य भी तय किया है। इसे तभी पूरा किया जा सकता है कि जब सभी राज्यों के आरटीओ कार्यालयों को कंप्यूटर के माध्यम से आपस में जोड़ दिया जाए। इस परियोजना पर केंद्र सरकार की ओर से 148 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसमें नेशनल इंर्फोमेटिक्स सेंटर [एनआईसी] का सहयोग लिया जा रहा है।