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बच्चों ही नहीं, निरक्षर माताओं को भी पढ़ायेंगे टोला सेवक

पहल. एक से डेढ़ घंटे के ट्यूशन के बाद बच्चे पहुंचेंगे स्कूल
अक्षर आंचल योजना में दलित-महादलित के बच्चों का स्कूलों में नामांकन तो हो जाता है, लेकिन वे लगातार स्कूल नहीं आ पाते हैं. ऐसे में टोला सेवकों को यह टास्क दिया गया है.

पटना : राज्य के करीब 20 हजार टोला सेवक अब दलित-महादलित, अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों को स्कूल लाने से पहले एक से डेढ़ घंटे तक ट्यूशन देंगे. वहीं, दोपहर एक से तीन बजे तक उनकी निरक्षर माताओं को पढ़ायेंगे. इसके लिए सभी जिलों के जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को निर्देश दे दिया गया है.

शुक्रवार को शिक्षा विभाग में डीपीओ, स्टेट रिसोर्स पर्सन की जन शिक्षा निदेशालय में हुई बैठक में यह निर्देश दिये गये. जन शिक्षा निदेशालय के निदेशक विनोदानंद झा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के बाद उन्होंने बताया कि अक्षर आंचल योजना में दलित-महादलित के बच्चों को स्कूल से तो जोड़ दिया जाता है. 99 प्रतिशत नामांकन भी हो जाता है, लेकिन वे लगातार स्कूल नहीं आ पाते हैं. इसलिए यह निर्देश दिया गया है कि टोला सेवक स्कूल में क्लास शुरू होने से पहले एक से डेढ़ घंटे तक बच्चों को ट्यूशन दें.

उसके बाद साथ में लेकर स्कूल तक छोड़े और एक से दो घंटी तक रुके. इससे बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित होगी. इसके बाद दोपहर एक बजे तीन बजे तक बच्चों की निरक्षर माताओं को पढ़ायें. माताएं पढ़ना नहीं चाहेंगी तो उन्हें बच्चों को परखने के लिए पढ़ाने के लिए टोला सेवक प्रेरित करेंगे. इससे वे महिलाएं उनके बच्चों की पढ़ाई कैसे चल रही है, उसके बारे में जांच कर सकेंगी. इन महिलाओं को अक्षर ज्ञान, पढ़ाई के साथ स्वास्थ्य व विकास के बारे में भी जानकारी दी जा सकेगी. साक्षरता दिवस के दिन सभी ने संकल्प लिया है कि बच्चे पढ़े और कोई भी निरक्षर न रहे. बैठक में जन शिक्षा के सहायक निदेशक मो. गालिब समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.

जन शिक्षा के निदेशक विनोदानंद झा ने बताया कि सभी जिलों के डीपीओ, स्टेट रिसोर्स पर्सन और टोला सेवकों को मूल्य बोध प्रशिक्षण दिया जायेगा. इसमें उन्होंने पॉजिटिव साइक्लॉजी के बारे में बताया जायेगा. प्रशिक्षण के बाद वे बच्चों को इसके बारे में बतायेंगे.
अभी किसी का ना नहीं मालूम है तो वह उसके फिजिक से जाने जाते हैं. काला, गोरा, लंबा, छोटा, मोटा, पतला, लंबे बाल वाला, छोटे बाल वाला समेत अन्य चीजें उसकी पहचान होती है. इसमें बदलाव की जरूरत है. बच्चों की पहचान उसकी बौद्धिक क्षमता से क्यों नहीं की जा सकती है. आज के स्ट्रेस के बीच बच्चों को कैसे सक्षम बनाया जाये यह काम करना है. इससे बच्चों के साथ ही समाज का भी विकास होगा.

पटना. शिवहर जिले में डिग्री कॉलेज खोलने का रास्ता साफ हो गया है. शिवहर के नवाब हाइ स्कूल में डिग्री कॉलेज खोलने की शिक्षा विभाग ने अपनी सहमति जता दी है. अब बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर को स्कूल का निरीक्षण कर आगे की कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है. शिवहर में खुलने वाले डिग्री कॉलेज में फिलहाल आर्ट्स की पढ़ाई शुरू हो सकेगी. जैसे-जैसे उसके बिल्डिंग बनेंगे साइंस, कॉमर्स व वोकेशनल कोर्स की पढ़ाई शुरू हो सकेगी. राज्य का शिवहर ही एक ऐसा जिला है, जहां एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है. शिक्षा मंत्री डा. अशोक चौधरी के निर्देश के बाद शिवहर में सबसे पहले दूरस्थ शिक्षा प्रणाली से पढ़ाई शुरू की गयी, जिसमें बहुत से छात्र-छात्राओं ने नामांकन लिया है.

शिवहर जिले में डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए जमीन भी चिह्नित कर लिया गया है और राजस्व व भूमि सुधार विभाग ने 12.13 एकड़ जमीन को स्वीकृति भी दे दी है. अब सरकार ने उस पर भवन बनाने के लिए जिला से प्रपोजल आया है. इसमें पांच करोड़ रुपये भी स्वीकृत किये गये हैं. जिससे निर्माण का काम शुरू हो सकेगा. शिवहर जिले ने ही यह भी प्रोपोजल दिया था कि नवाब हाइ स्कूल में 10 कमरे खाली हैं. साथ ही पर्याप्त खाली जमीन भी है. ऐसे में इस स्कूल में डिग्री कॉलेज की शुरुआत की जा सकती है.