Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 73
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Deprecated (16384): The ArrayAccess methods will be removed in 4.0.0.Use getParam(), getData() and getQuery() instead. - /home/brlfuser/public_html/src/Controller/ArtileDetailController.php, line: 74
 You can disable deprecation warnings by setting `Error.errorLevel` to `E_ALL & ~E_USER_DEPRECATED` in your config/app.php. [CORE/src/Core/functions.php, line 311]
Warning (512): Unable to emit headers. Headers sent in file=/home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php line=853 [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 48]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 148]
Warning (2): Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /home/brlfuser/public_html/vendor/cakephp/cakephp/src/Error/Debugger.php:853) [CORE/src/Http/ResponseEmitter.php, line 181]
Notice (8): Undefined variable: urlPrefix [APP/Template/Layout/printlayout.ctp, line 8]news-clippings/बजट-में-हुई-अनदेखी-का-अर्थ-डा-भरत-झुनझुनवाला-11247.html"/> न्यूज क्लिपिंग्स् | बजट में हुई अनदेखी का अर्थ-- डा. भरत झुनझुनवाला | Im4change.org
Resource centre on India's rural distress
 
 

बजट में हुई अनदेखी का अर्थ-- डा. भरत झुनझुनवाला

वित्त मंत्री ने बजट में सरकार के पूंजी खर्चों को बढ़ाने की बात कही है. ग्रामीण सड़क एवं विद्युतीकरण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में निवेश बढ़ाया गया है. यह कदम सही दिशा में है. इस दिशा में पहली चुनौती कार्यान्वयन की है. एनडीए सरकार के अब तक के प्रथम तीन वर्षों में सरकार के पूंजी खर्चों में गिरावट आयी है.

यह क्षम्य है, चूंकि बीत वर्षों में सरकार पर सातवें वेतन आयोग तथा वन रैंक वन पेंशन के बोझ आ पड़े थे. अब इस बोझ को अर्थव्यवस्था झेल चुकी है और वित्त मंत्री के लिए पूंजी निवेश में वृद्धि करना संभव है.

 

वित्त मंत्री ने छोटे उद्योगों द्वारा देय इनकम टैक्स में कटौती की है. उनकी मंशा सही दिशा में है, परंतु छोटे उद्योग इनकम टैक्स तभी अदा करते हैं, जब वे जीवित रहें. वर्तमान में छोटे उद्योगों पर दोहरी मार पड़ रही है.

 


छोटे उद्योगों को गतिमान बनाने के लिए एक्साइज ड्यूटी में छूट बढ़ानी थी. मान लीजिये, छोटे उद्योग में साबुन के उत्पादन की लागत 10 रुपये आती है. बड़े उद्योग द्वारा वही साबुन 8 रुपये में बना ली जाती है. बड़े उद्योग को 3 रुपये एक्साइज ड्यूटी अदा करनी हो, तो उन्हें इसे 11 रुपये में बेचना होगा. ऐसे में छोटे उद्योग को एक्साइज ड्यूटी अदा न करनी हो, तो वे इसे 10 रुपये में बेच सकते हैं. तब छोटे उद्योग चल निकलेंगे. समानांतर कदम में छोटे उद्योगों द्वारा बनाये जा रहे माल पर आयात कर भी बढ़ाना होगा. 
अन्यथा बड़े घरेलू उद्योगों के स्थान पर हमारे छोटे उद्योग बड़े विदेशी उद्योगों के हाथ मारे जायेंगे. छोटे उद्योगों पर इनकम टैक्स में छूट बढ़ाने की जगह एक्साइज ड्यूटी में छूट देनी थी और आयात में वृद्धि करनी थी. वित्त मंत्री ने छोटे उद्योगों को इस मूल समस्या की अनदेखी की है, इसलिए इनकी स्थिति दुरूह बनी रहेगी. इन उद्योगों द्वारा ही अधिकतर रोजगार उत्पन्न किये जाते हैं, इसलिए आनेवाले समय में रोजगार की स्थिति भी कठिन बनी रहेगी.

 

 


वित्त मंत्री बजट में कृषि की बुनियादी संरचना में निवेश बढ़ाने की बात कही है. मनरेगा के अंतर्गत उत्पादक कार्य करने पर जोर रहेगा. ग्रामीण सड़कों का विस्तार किया जायेगा. गांवों के विद्युतीकरण को अधिक धन उपलब्ध कराया गया है.

 

 


ये कदम स्वागतयोग्य हैं, परंतु इनके बावजूद किसान की आय दोगुनी होने के स्थान पर घटती जायेगी. इन निवेश से किसान की उत्पादन लागत में गिरावट आयेगी. टमाटर का उत्पादन वह 20 रुपये प्रति किलो के स्थान पर 19 रुपये प्रति किलो में कर सकेगा. परंतु बाजार में टमाटर के दाम 21 रुपये से घट कर 18 रुपये रह जायें, तो किसान का घाटा बढ़ेगा. पहले वह 20 रुपये में उत्पादन करके 21 रुपये में बेचता था. आजादी के बाद से किसान की यही कहानी रही है. सरकार ने कृषि में निवेश किया, किसान ने उत्पादन बढ़ाया, परंतु दाम घटते गये और किसान मरता गया. कृषि में निवेश बढ़ाने से कृषि उत्पादों के निरंतर गिरते दाम की समस्या हल नहीं होती है.

 

 


यहां संज्ञान लेना चाहिए कि कृषि उत्पादों के गिरते मूल्य का लाभ शहरी उपभोक्ताओं को मिलता है. आज देश की 60 प्रतिशत आबादी शहरों में रहने लगी है अथवा परिवार के कर्ता शहर में रोजगार करते हैं.

 

 


शहरवासियों की टीवी तथा सोशल मीडिया में भी पहुंच है. वोट की गणित में शहरवासी भारी पड़ते हैं. इसलिए वित्त मंत्री ने अनकहे तौर पर शहर के हितों को साधा है और गांव को स्वाहा किया है. राजनीतिक दृष्टि से वित्त मंत्री के पास दूसरा विकल्प नहीं था. कृषि उत्पादों के गिरते मूल्यों की अनदेखी करना उनकी राजनीतिक मजबूरी थी. परंतु तब वित्त मंत्री को किसान की आय दोगुना करने के फर्जी वायदे करके गुमराह नहीं करना चाहिए.

 

 


वित्त मंत्री ने बजट में सेवा कर में वृद्धि नहीं की है. परंतु, साथ-साथ संकेत दिया है कि गुड्स एंड सर्विस टैक्स के लागू होने पर सेवाओं पर देय सर्विस टैक्स में वृद्धि की जायेगी. इस मंतव्य पर सावधानी से चलना चाहिए. इस समय देश की लगभग 55 प्रतिशत आय सेवा क्षेत्र से आ रही है. सेवा क्षेत्र में ही नये रोजगार उत्पन्न हो रहे हैं. इसलिए सेवा कर बढ़ाना सोने के अंडा देनेवाली मुर्गी पर टैक्स बढ़ाना सरीखा होगा. लेकिन, इस क्षेत्र को टैक्स से अछूता भी नहीं छोड़ा जा सकता है. वित्त मंत्री को सड़कों आदि में निवेश करने के लिए राजस्व चाहिए.

 

 


संभव नहीं है कि देश की आय में 25 प्रतिशत योगदान करनेवाले मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र पर कर का बोझ बढ़ाया जाये ओर 55 प्रतिशत योगदान करनेवाले सेवा क्षेत्र को अछूता छोड़ दिया जाये. इस समस्या के समाधान के लिए वित्त मंत्री को चाहिए कि तमाम सेवाओं का अध्ययन करायें. आकलन करायें कि प्रत्येक सेवा में खपत का हिस्सा कितना है और उत्पादन का कितना. फिर सेवाओं को ‘खपत' एवं ‘उत्पादन' श्रेणियों में वर्गीकृत कर दें.

 

 


खपत वाली सेवाओं पर 18 प्रतिशत अथवा 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगायें. उत्पादन वाली सेवाओं पर 5 प्रतिशत या 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगायें. इससे सेवा क्षेत्र द्वारा टैक्स अदा किया जायेगा और साथ ही सेवाओं का उत्पादन भी बढ़ेगा. देश की आर्थिक विकास दर बढ़ेगी और रोजगार उत्पन्न होंगे. वित्त मंत्री की मंशा सही है, परंतु उपरोक्त विषयों की अनदेखी करने से इस बजट का परिणाम सुखद नहीं रहेगा.