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बड़ा घोटाला : सोलर लाइट तले अंधेरा-- राजीव रंजन

पटना : अंधरे में डूबे बिहार के ग्रामीण इलाके भले रोशन न हुए हों, लेकिन सोलर लाइटों की खरीद में मुखिया से लेकर डीएम तक और सोलर लाइटों की आपूर्ति करनेवाले फर्जी आपूर्तिकर्ता मालामाल हो गये हैं. अगर इस घोटाले के आकार पर नजर डालें, तो इसे राज्य के बहुचर्चित चारा घोटाले से किसी भी रूप में कम नहीं आंका जा सकता.

अभी महज तीन जिलों बक्सर, भोजपुर और वैशाली में हुई प्रशासनिक जांच में करीब 42 करोड़ का घोटाला सामने आ चुका है, जबकि सोलर लाइटों की खरीद राज्य के सभी 38 जिलों की सभी 8463 पंचायतों, 531 पंचायत समितियों, 88 नगर पंचायतों और 42 नगर पर्षदों में की गयी थी. सोलर लाइटें खरीदने के लिए न टेंडर निकाला गया था और न ही किसी भी सरकारी प्रावधानों का पालन किया गया.

अंधेरे में डूबे जिन गांवों में ये सोलर लाइटें लगायी गयीं, उन गांवों में किसी ने भी कभी इन्हें जलते हुए नहीं देखा.
सोलर लाइटों की खरीद मुखिया के अलावा बीडीओ, डीएम, पंचायत समितियों, नगर पंचायतों और नगर पर्षदों के स्तर पर की गयी है. सबसे चौंकानेवाली बात है कि केंद्र प्रायोजित इस योजना में केंद्र सरकार ने सोलर लाइटों की खरीद के जो मानक तय कर रखे थे, उनका किसी भी स्तर पर पालन नहीं किया गया.

केंद्र ने टाटा बीपी कंपनी कीसोलर लाइट ही खरीदने का प्रावधान किया था, लेकिन मुखिया से लेकर डीएम ने चाइनीज सोलर लाइटों की खरीद उन अनधिकृत आपूर्तिकर्ताओं से की, जिनके पास इस तरह की लाइट बेचने का कोई पुराना अनुभव तक नहीं था और न ही उन्होंने इससे पहले कभी इस तरह की लाइट बेची थी. केंद्र सरकार की इस योजना में बिहार के उन गांवों को रोशन करने का लक्ष्य था, जहां आजादी के 67 वर्षो बाद भी बिजली नहीं पहुंची है.

नागरिक अधिकार मंच की जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पटना हाइकोर्ट में बक्सर, भोजपुर और वैशाली के डीएम ने स्वीकार किया कि उनके जिलों में सोलर लाइटों की खरीद और उनकी स्थापना में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गयी है.
आरटीआइ के तहत यह खुलासा हुआ है कि जिस सोलर लाइट की खरीद मुखिया ने 32 हजार रुपये में की थी, उस लाइट की खरीद बीडीओ ने 38 हजार रुपये में और डीएम ने 46 हजार रुपये में की है. सोलर लाइटों की खरीद में ही गड़बड़ी नहीं की गयी है, बल्कि उसकी ढुलाई से लेकर उसे स्थापित किये जाने तक में राशि का बंदरबांट किया गया है.

बक्सर के लिए पटना के चांदनी चौक मार्केट से खरीदी गयी 40 किलो वजन की एक सोलर लाइट की बक्सर तक की ढुलाई के लिए डेढ़ हजार रुपये का भुगतान किया गया, जबकि उसे स्थापित करने के लिए अलग से तीन हजार रुपये के भुगतान का बिल पेश किया. जबकि टाटा बीपी की सोलर लाइट बाजार में महज 28 से 29 हजार रुपये में ढुलाई और उसे स्थापित करने के शुल्क साथ उपलब्ध है. वह भी पांच साल की गारंटी के साथ.सरकार के प्रावधानों के अनुसार एक लाख रुपये से अधिक की किसी भी खरीद के लिए निविदा प्रकाशित करना आवश्यक है, लेकिन करोड़ों रुपये के सोलर लाइट की खरीद में इसका कोई ध्यान नहीं रखा गया.
कंपनियां छोड़ कर लोकल लाइट खरीदी

मानक के अनुसार सोलर लाइट की खरीद के लिए केंद्र ने राशि के साथ टाटा बीपी की सोलर लाइट लगाने का निर्देश दिया था. लेकिन, इसकी खरीद में अपवाद को छोड़ कर किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में इस कंपनी की लाइटें नहीं लगायी गयीं. इन लाइटों की खरीद में हुई वित्तीय अनियमितता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बक्सर के तत्कालीन डीएम ने सोलर लाइटों की खरीद मधुबनी जय भैरो एग्रो एजेंसी से की, जबकि इसकी खरीद पटना के अधिकृत विक्रेता से भी की जा सकती थी.

इसी तरह कुछ सोलर लाइटें पटना जंकशन के पास चांदनी चौक मार्केट की भारत इंजीनियरिंग से खरीदी गयी हैं. बक्सर में प्रकाश सोलर लाइट हाउस, बाजार समिति रोड और वैशाली में हाजीपुर के डाक बंगला रोड स्थित किसान पाइप से सोलर लाइटें खरीदी गयी हैं.

इनमें से कोई भी दुकान टाटा बीपी की सोलर लाइट के अधिकृत विक्रेता नहीं है. आश्चर्य की बात तो यह है कि टाटा बीपी की सोलर लाइट की पूरी जानकारी उसकी वेबसाइट पर भी उपलब्ध है, लेकिन इंटरनेट और आरटीआइ के इस युग में भी घोटालेबाजों के मनोबल पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा.