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बिहार में शराबबंदी का नया कानून आज से लागू

पटना : बिहार में शराबबंदी का नया कानून गांधी जयंती के दिन दो अक्तूबर से लागू हो जायेगा. इसकी अधिसूचना रविवार की सुबह जारी हो जायेगी. इसकी घोषणा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की. शराबबंदी पर एक दिन पहले पटना हाइकोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहली बार इस मामले पर बोलते हुए कहा कि शराब का कारोबार नैतिक नहीं था. इस अनैतिक व्यापार से पांच हजार करोड़ के घाटे का तर्क दिया जा रहा है, जबकि इसके बंद हो जाने से 10 हजार करोड़ रुपये की बचत हो रही है. इससे दूसरे व्यवसाय बढ़ेगा और सरकार को उससे टैक्स मिलेगा. सरकार दूसरे कारोबारों को बढ़ाना चाहती है.

दादी जी मंदिर परिसर में अग्रसेन जयंती समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि शराबबंदी के नये विधेयक को विधानमंडल का दोनों सदन पारित कर चुका है और इस पर राजभवन की सहमति मिल गयी है. साथ ही सात सितंबर को कैबिनेट ने भी अपनी मंजूरी दे दी है. सरकार ने इसे गांधी जयंती के अवसर पर लागू करने का निर्णय लिया था, इसलिए रविवार से यह प्रभावी हो जायेगा. मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग अभी भी भ्रम में हैं, उन्हें अपना भ्रम तोड़ लेना चाहिए. कुछ लोग शराबबंदी से आहत होते हैं तो तरह-तरह की बात करते हैं. शराबबंदी से बिहार को बड़ा लाभ हो रहा है और आगे भी होगा.

बिहार साल-दो साल में प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा. शराबबंदी से सामाजिक परिवर्तन आया है. इसका जो लोग विरोध करते हैं वे गांव में जाकर पहले और अब का माहौल देखें. इससे लोगों का सोच बदल रहा है. सरकार का सोच सिर्फ मुनाफा कमाना नहीं है, जनता का फायदा हो यही सरकार का स्वार्थ है. मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी के चंपारण सत्याग्रह के 100 साल अगले साल होना है. उन्होंने शराबबंदी का नारा दिया था. उनके विचारों के अनुसार इसे लागू करने से बड़ी श्रद्धांजलि और क्या हो सकती है? उन्होंने समारोह में उपस्थित महिलाओं से अपील की कि वे मुखर हों. अपनी मीटिंग बुलाकर पूर्ण नशामुक्ति के लिए प्रस्ताव पारित करें और घूम-घूम कर प्रचार करें. मुख्यमंत्री ने व्यवसािययों को सामाजिक, युवाओं के क्षेत्र में काम करने के अलावा बुजुर्गों की सेवा के लिए कार्यक्रम तैयार करने का सुझाव दिया.

विभिन्न तबकों के सीनियर सिटीजन का ख्याल रखें. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में व्यवसाय बढ़ रहा है और दिना-नु-दिन व्यवसाय बढ़ेगा, इसमें कोई दो राय नहीं है. समाज का विकास बिना शिक्षा के संभव नहीं है. इन्हीं सभी कामों से विकास को प्रगति मिलती है. संस्थान द्वारा सामािजक क्षेत्रों के अलावा बच्चों के उत्थान, स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में किये जा रहे कामों की भी मुख्यमंत्री ने सराहना की. समारोह में विधान पार्षद ललन सरार्फ, विधायक संजीव चौरिसया, जदयू प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक, राज्य नागरिक परिषद् के पूर्व महासिचव छोटू सिंह, अमर अग्रवाल, पीके अग्रवाल मुख्य रूप से मौजूद थे. समारोह में विश्वंबर झुनझुनवाला ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए मुख्यमंत्री को चेक भी सौंपा.

राज्य कैबिनेट की आज विशेष बैठक
पटना. राज्य में नया शराबबंदी कानून दो अक्तूबर से लागू होने जा रहा है. इस नये कानून को विधान मंडल के मॉनसून सत्र से पास होने के बाद राज्यपाल ने भी मंजूरी दे दी है. राज्य सरकार ने रविवार की दोपहर एक बजे कैबिनेट की विशेष बैठक बुलायी है. कैबिनेट की बैठक मेंं शराबबंदी पर हाइकोर्ट के फैसले व नया शराबंदी कानून पर चर्चा की जायेगी. नये कानून में पांच अप्रैल से लागू हुए पूर्ण शराबबंदी कानून से सख्त प्रावधान किये गये हैं. सरकार ने पांच अपैल के प्रभाव से बिहार उत्पाद अधिनियम-1915 को संशोधित करके उत्पाद (संशोधन) अधिनियम-2016 लागू किया गया था. परंतु दो महीने के दौरान इस नये विधेयक में कई बातों पर फिर से संशोधन करने की जरूरत महसूस की गयी. इसके बाद मानसून सत्र के दौरान उत्पाद विधेयक में दोबारा संशोधन किया गया और इसे अब रविवार से लागू किया जा रहा है.

इस नये संशोिधत कानून में कई स्तर पर विशेष बदलाव किये गये हैं. अब शराब से जुड़ी तमाम तरह की गतिविधि को पूरी तरह से अपराध की श्रेणी में रखा गया है. इसके तहत अगर कोई व्यक्ति शराब से जुड़ी किसी तरह की गतिविधि में पकड़ा जाता है, तो वह पूरी तरह से गैर-जमानती होगा. अब अगर राज्य में कोई व्यक्ति शराब पीये हुए यानी किसी दूसरे राज्य या स्थान से शराब पीकर यहां आ जाता है. तब भी उसे उतना ही दोषी माना जायेगा, जितना राज्य में शराब पीये हुए पकड़ा जाता है. इस अपराध को गैर-जमानती की श्रेणी में शामिल किया गया है.

नये विधेयक में किये गये ये बदलाव :
- नये कानून के तहत अगर किसी घर में शराब बरामद की जाती है, तो उस परिवार के सभी व्यस्क (18 वर्ष से अधिक) सदस्य को जेल भेज दिया जायेगा. इसमें बुजुर्ग और महिला सभी शामिल हैं.
- शराब की लत नहीं छूटने पर या संबंधित व्यक्ति की आदत में कोई सुधार नहीं आने पर संबंधित जिले के डीएम उस पियक्कड़ को जिला बदर या तड़ीपार कर सकते हैं. यह कारर्वाई अपराधियों के खिलाफ धारा-66 के तहत की जाने वाली कार्रवाई की तरह की जायेगी.
- डीएम को यह अधिकार दिया गया है. पहले पियक्कड़ को छह महीने के लिए बॉड भरवाकर तड़ीपार किया जायेगा. इसके बाद भी स्थिति नहीं बदलने पर अधिकतम दो वर्ष के लिए जिला बदर किया जा सकता है.
- अगर किसी गांव में चूलाई की दारू बार-बार पकड़ी जाती है या चूलाई की दारू पकड़ने के दौरान गांव वाले विरोध करते हैं, तो पूरे गांव पर सामूहिक जुर्माना हो सकता है. हालांकि गांव वालों को इसमें अपना पक्ष रखने की पूरी छूट रहेगी.
- सभी जिलों में शराबबंदी कानून के तहत मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष न्यायालय स्थापित किया जायेगा. इसके जज को सेशन कोर्ट के जज के बराबर पॉवर होंगे.
- पुलिस की तरह ही उत्पाद दारोगा और अन्य पदािधकारी को सीआरपीसी के तहत कार्रवाई करने का अब अधिकार दिया जायेगा.
- उत्पाद अधिनियम के तहत किसी अपराधी के फरार होने की स्थिति में पहले उसका विज्ञापन निकाला जायेगा. फिर भी सरेंडर नहीं करने पर संबंधित अपराधी के घर की कुर्की-जब्ती तक की जायेगी.
- किसी पर जुर्माना करने की स्थिति में अगर समय पर जुर्माना राशि जमा नहीं करता है, तो एफआइआर और तीन साल तक की सजा होगी.
- शराब के मामले में एक बार पकड़े जाने पर अगर वही व्यक्ति दोबारा फिर से पकड़ा जाता है, तो पहले से दोगुणा सजा होगी. उदाहरण के लिए अगर पहली बार में तीन साल के लिए गया, तो दूसरी बार में छह साल की सजा होगी.

बिहार मद्यनिषेध उत्पाद विधेयक 2016
- एक अगस्त : बिहार विधानसभा से ‘'बिहार मद्यनिषेध उत्पाद विधेयक 2016'' पास
- दो अगस्त : बिहार विधान परिषद् से ‘'बिहार मद्यनिषेध उत्पाद विधेयक 2016'' पास
- दो अगस्त : विधेयक को मंजूरी के लिए राजभवन भेजा गया प्रस्ताव
- सात सितंबर : राज्यपाल ने ‘'बिहार मद्यनिषेध उत्पाद विधेयक 2016'' को किया मंजूर
- 14 सिंतबर : राज्य कैबिनेट ने ‘'बिहार मद्यनिषेध उत्पाद विधेयक 2016'' को दी मंजूरी, दो अक्टूबर से लागू करने की घोषणा.