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मैंग्रोव रोपाई के लिए प्लास्टिक की जगह लेते ताड़ के पत्तों से बने नर्सरी बैग

मोंगाबे हिंदी, 29 अगस्त

फूस से बनी अपनी झोपड़ी के पास बैठकर, अचिक्कन्नु मछली पकड़ने के टूटे हुए जाल से बने बाड़ पर रखे ताड़ के सूखे पत्ते (बोरासस फ्लेबेलिफ़र) की तरफ हाथ बढ़ाती हैं। वह पत्तियों को बराबर हिस्सों में काटती हैं। बार-बार बुखार से जूझने के बावजूद, वह ताड़ के सूखे पत्तों से 40 मिनट में एक नर्सरी बैग तैयार कर सकती हैं। तमिलनाडु के तंजावुर जिले के एक तटीय गांव कोल्लुक्काडु की कई महिलाओं की तरह, 70 साल की अचिक्कन्नु आजीविका के लिए इन पत्तियों पर निर्भर हैं। उन्हें एक बैग बनाने के लिए 15 रुपए मिलते हैं।
वैसे लंबे वक्त से घर की छतों को ढकने के साथ टोकरियां, चटाइयां और क्रॉकरी बनाने के लिए ताड़ की सूखी पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि, अचिक्कन्नु पत्तियों का इस्तेमाल एक अलग उद्देश्य के लिए कर रही हैं। इनका इस्तमाल पौधे रोपने के लिए नर्सरी बैग बनाने में होगा। इन बैग का इस्तेमाल तमिलनाडु के तट पर पाक की खाड़ी के किनारे मैंग्रोव के पौधों को फिर से लगाने के लिए किया जाएगा। इससे प्लास्टिक बैग पर निर्भरता कम होगी। आम तौर पर नर्सरी में प्लास्टिक बैग का ही इस्तेमाल होता है।
पूरी रपट- मोंगाबे हिंदी