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मध्य प्रदेश: अगस्त में सूखे से और सितंबर में बारिश से फसलें बर्बाद

डाउन टू अर्थ, 25 सितम्बर 

नर्मदापुरम जिले की सिवनी मालवा तहसील के ग्राम भैरोपुर के रहने वाले किसान संतोष पटवारी बताते हैं कि अगस्त माह में उनके क्षेत्र में 18 दिन तक बारिश नहीं हुई थी। सूखे जैसे हालत निर्मित हो गए थे। इससे धान, मक्का, सोयाबीन की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई। सितंबर के पहले सप्ताह में लंबे अंतराल के बाद बारिश शुरू हो गई। भारी बारिश से इल्ली तो गायब हो गई, लेकिन तेज हवा के कारण सोयाबीन की फसल जमीन पर बिछ गई।

वह कहते हैं कि कहीं-कहीं सोयाबीन फसल खड़ी है, लेकिन उसमें फल्लियां नहीं है। एक एकड़ में फसल की बुआई करने से लेकर बीज खरीदने व अन्य खर्चे मिलाकर न्यूनतम 15 से 18 हजार रुपए खर्च हुए थे। अब यह राशि भी निकलने की उम्मीद नहीं है।

इसी जिले के ग्राम बैराखेड़ी निवासी शैलेंद्र सिंह राजपूत कहते हैं कि उन्होंने 9 एकड़ में धान लगाई थी। अचानक तेज बारिश हुई और बाढ़ के कारण धान डूब गई और कुछ जमीन पर बिछ गई। वह कहते हैं कि 50 प्रतिशत भी उत्पादन हो जाए तो किस्मत है।

सिवनी मालवा के किसान सूरज बली जाट कहते हैं कि मैंने तो 20 एकड़ में सोयाबीन लगाई है। मजदूरी, मेहनत, डीजल, बीज की कीमत मिलाकर प्रति एकड़ 25 हजार रुपए का खर्च बैठा है, यह राशि भी निकल पाना मुश्किल है क्योंकि अगस्त महीने में बारिश नहीं हुई। किसी तरह मोटर पंप से सिंचाई करके 5 एकड़ की फसल को बचाया। इल्लियां ने सोयाबीन की पत्तियां ही नहीं खाई बल्कि उसमें जो छोटी—छोटी फल्लियां लग रही थीं, उन्हें भी नुकसान पहुंचाया।
पूरी खबर- डाउन टू अर्थ