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मप्र में कपिल धारा के 90 प्रतिशत कुओं में भ्रष्टाचार का बारूद

पेटलावद से जितेंद्र यादव। पेटलावद हादसे में 89 निर्दोष लोगों की जान लेने वाले बारूद के पीछे भ्रष्टाचार की एक ऐसी कहानी भी छिपी है जिसके किरदार जिला और जनपद पंचायत के अफसरों से लेकर ग्राम पंचायत के सचिव और सरपंच तक हैं। इस कहानी में ब्‍लास्टिंग का धंधा करने वाले कांसवा सहित अन्य कारोबारियों का भी सीधा हाथ सामने आ रहा है।

 

झाबुआ जिले में मनरेगा के तहत सरकार की कपिल धारा योजना में भ्रष्टाचार के इसी बारूद से 90 प्रतिशत कुओं की खुदाई हुई है। आंकड़े बताते हैं जिले में पिछले नौ सालों में 22 हजार आठ सौ कुएं खोदे गए। जिसमें से 4 हजार 242 कुएं अब भी अधूरे हैं। बताया जाता है कि गरीब किसानों के कई कुएं इसलिए अधूरे हैं कि ब्लास्टिंग पर बड़ी राशि खर्च कर दी गई और योजना का पूरा पैसा खत्म हो गया।
ऐसे-ऐसे केस
पैसा निकल गया और कुआं अधूरा
रामगढ के पूनमचंद कोदाजी पाटीदार को वर्ष 2009 में कपिल धारा योजना का कुआं मिला। शासन से 96 हजार स्र्पए मंजूर हुए, लेकिन केवल 45 हजार ही उसे मिले। सरपंच और सचिव ने उसके खाते से पैसा निकाल लिया, और फर्जी तरीके से पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
हकीकत ये है कि पूनमचंद का कुआं आज तक पूरा नहीं हो पाया। कच्चा कुआं धंस रहा है और खुदाई भी पूरी नहीं हुई है। पूनमचंद पिछले दो साल से मामले की शिकायत कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक कर चुका है,लेकिन कुआं जस का तस है।
6 साल में कुएं का हिसाब नहीं दिया
आदिवासी किसान मला नानूराम भयड़ा ने सोचा था कि सरकार की कपिल धारा योजना में कुआं मिलने से उसके खेत पर सिंचाई हो जाएगी,लेकिन उसका सपना अब तक अधूरा है। पंचायत ने मंजूर राशि में से उससे ब्लास्टिंग के 10 हजार रुपए तो लिए ही, डीजल भी उसी से लिया। नानूराम कहते हैं, छह साल हो गए, मुझे न तो कुएं का हिसाब बताया और ना ही कुआं पूरा खुदवाया।
माही परियोजना में हर साल 20 करोड़ की ब्लास्टिंग
अफसर और नेताओं के रिश्तेदारों के वारे-न्यारे
झाबुआ जिले की महत्वाकांक्षी माही सिंचाई परियोजना में भी विस्फोटक से नहरों की खुदाई का बड़ा काम चल रहा है। सूत्र बताते हैं कि इस परियोजना में हर साल लगभग 20 करोड़ ब्लास्टिंग पर खर्च हो रहे हैं। पेटलावद के कांसवा बंधुओं के अलावा झाबुआ, सारंगी, थांदला, रायपुरिया आदि जगहों के 100 से अधिक छोटे ठेकेदार इसमें लगे हैं।
इनमें कुछ ठेकेदार सीधे अफसर और नेताओं से जुड़े हुए हैं, तो कुछ उनके रिश्तेदार हैं। जबसे माही परियोजना का काम चल रहा है, कुछ ब्लास्टिंग ठेकेदारों के वारे-न्यारे हो चुके हैं। परियोजना की मुख्य नहर का काम दो साल से यहां चल रहा है। अभी तक 70 फीसदी काम हो पाया है।
इनका कहना है
कपिल धारा योजना के कुओं में जहां हार्ड स्टेटा आता है वहां ब्‍लास्टिंग का प्रावधान है, लेकिन यदि कहीं ब्लास्टिंग कर कुएं अधूरे छोड़ दिए गए हैं या हितग्राहियों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है तो उसकी जांच कराई जाएगी। मनरेगा के पेडिंग कामों का सर्वे करवाया जा रहा है।
-रघुराज राजेंद्रन, आयुक्त, मध्यप्रदेश रोजगार गारंटी परिषद
फैक्ट्स
- झाबुआ और पेटलावद में हर महीने लगभग 500 पेटी विस्फोटक आता है। इसमें 200 जिलेटिन रॉड और 200 से ज्यादा डिटोेनेटर होता है।
- यह कनसाइंटमेंट आमतौर पर अवैध रूप से नागपुर से मंगवाई जाती है। नियम मुताबिक कोई भी विस्फोटक एक्सप्लोसिव वैन में लाया जाना चाहिए, लेकिन यह अवैध रूप से निजी गाड़ियों में ही ले आते हैं। जितने नाके पड़ते हैं उनमें रुपए बांटते हुए चलते हैं।
- एक पेटी 1000-1200 रुपए में आती है। जो यहां पर 4000-8000 रुपए तक बेची जाती है। यानी 8 गुना तक फायदा कमाते हैं।
- आम तौर पर कुआं खोदने और गिट्टी की खदानों में ब्लास्टिंग के लिए इसका इस्तेमाल होता है। मगर दो सालों से माही प्रोजेक्ट के कारण इसकी खपत अचानक बढ़ गई है। इसमें नहरों की खुदाई में भी इसकी जरूरत पड़ती है। जिसमें बड़े लेवल पर स्थानीय कारोबारी जुड़े हुए हैं।