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महानदी जल विवाद सुलझाने 33 साल पहले तय बोर्ड अब बनेगा

नई दिल्ली/रायपुर (ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ व ओडिशा के बीच महानदी जल बंटवारे का विवाद सुलझाने के प्रयास तेज हैं। छत्तीसगढ़ ने संयुक्त नियंत्रण बोर्ड बनाने पर सहमति दे दी है। 33 साल पहले दोनों राज्यों के तत्कालीन मुख्यमंत्रियों ने इस बोर्ड के गठन का निर्णय लिया था।

अब सीएम डॉ. रमन सिंह की सहमति से राज्य के सीएस विवेक ढांड ने शुक्रवार को नई दिल्ली में हुई केंद्रीय जल आयोग की बैठक में इस पर रजामंदी दी। ओड़िशा के सीएस एपी पाधी ने कहा कि सीएम से चर्चा के बाद निर्णय होगा। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जलसंसाधन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. अमरजीत सिंह ने की।

बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि दोनों राज्य अपने अधिकार क्षेत्र में महानदी पर निर्मित सभी परियोजनाओं सहित अन्य जानकारियां एक दूसरे से साझा करेंगे। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव ने कहा कि अधिकांश जानकारी हम आज ही उपलब्ध करा रहे हैं और बाकी जानकारी 15 दिन में उपलब्ध करा दी जाएगी। ढांड ने ओड़िशा के अधिकारियों से भी महानदी पर उनके राज्य में संचालित परियोजनाओं और पानी के उपयोग के संबंध में जानकारी प्रदान करने का आग्रह किया ।

मुख्य सचिव ढांड ने कहा कि छत्तीसगढ़ अंतर्राज्यीय नदियों के पानी के उपयोग के लिए निर्धारित सभी प्रावधानों का सम्मान करता है। छत्तीसगढ़ महानदी के पानी का सीमित उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि ओड़िशा और छत्तीसगढ़ दोनों पड़ोसी राज्य है और दोनों के हित साझा हैं। एक बार जब विस्तृत जानकारी दोनों राज्यों के समक्ष आ जाएगी तो सभी प्रकार की भ्रांतियां दूर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 55 प्रतिशत हिस्से का पानी महानदी में जाता है।

हीराकुंड बांध में महानदी का औसत बहाव 40 हजार 773 एमसीएम है। इसमें से 35 हजार 308 एमसीएम का योगदान छत्तीसगढ़ देता है, जबकि छत्तीसगढ़ द्वारा वर्तमान में मात्र लगभग 9000 एमसीएम पानी का उपयोग किया जा रहा है, जो कि महानदी के हीराकुंड तक उपलब्ध पानी का सिर्फ 25 प्रतिशत है।

मुख्य सचिव ढांड ने बैठक में अविभाजित मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और ओड़िशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री जेबी पटनायक के बीच 28 अप्रैल 1983 को हुए समझौते की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने बताया कि इस समझौते के अनुसार दोनों राज्यों से जुड़े ऐसे मुद्दों के समाधान के लिए सर्वे, अनुसंधान और क्रियान्वयन के उद्देश्य से एक संयुक्त नियंत्रण मंडल के गठन का प्रस्ताव था, लेकिन इस बोर्ड का गठन अब तक नहीं हुआ है।