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मुखिया संवार रहे हैं गांव-पंचायत की सूरत

सरकार द्वारा पंचायतों को हस्तांतरित अधिकार का भरपूर उपयोग जामाताड़ा जिले के पंचायत प्रतिनिधियों ने किया. जब से सरकार ने शिक्षा, कल्याण, स्वास्थ्य, आपूर्ति, मनरेगा योजना का संचालन सहित अन्य कार्यक्रमों के अनुश्रवण का जिम्मा पंचायतों को दिया है, तब से इन प्रतिनिधियों में काम करने का एक अलग उत्साह देखा जा रहा है. प्रतिनिधि सरकार की सभी कल्याणकारी एवं महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद लोगों को दिलाने के लिए सजग हैं. हालांकि इन्हें पहली बार पंचायत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है. पूर्ण अधिकार तो इन्हें मिला, परंतु जो भी विभाग के अधिकार दिये गये उनकी सिर्फ निगरानी करने की जिनसे पंचायत प्रतिनिधि संतुष्ट नहीं है.

पंचायत प्रतिनिधियों की माने तो जबतक किसी विभाग का पंचायत स्तरीय नियंत्रण  सरकार नहीं देती है. तब तक इसका शत-प्रतिशत संचालन हो ही नहीं सकता. हालांकि इन आधे-अधूरे अधिकारों के बाद भी कुछेक मुखिया व पंचायत समिति सदस्यों ने अपने पंचायत में विकास योजनाओं को धरातल पर लाया है. कल्याणकारी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत दिलाने के लिए संघर्ष किया है. कुछेक कर्मी के दिल में चोट पहुंचाकर आम लोगों के भलाई के लिए काम किया है. चुनाव में भरपूर मदद करने वाले लोगों को भी अगर तकलीफ हो तब भी जरूरतमंद परिवार को या गांव के अंतिम व्यक्ति को पहला लाभ देने के लिए कदम उठाया है.

जन वितरण दुकान से प्रत्येक माह समय पर खाद्यान्न वितरण व तेल वितरण कराना सुनिश्चित कराया है. आंगनबाड़ी केंद्र जो सप्ताह में एक-दो दिन खोले जाते थे, पोषाहार कभी बांटा जाता था, तो कभी दुरुस्त किया है. विद्यालय के शिक्षक अधिकतर दिन बिना अवकाश लिये गायब रहते थे. उसमें कमी लायी है. पंचायत क्षेत्र के गांवों में कई छोटे-बड़े मामले को पंचायत द्वारा निबटाया गया है. कुल मिलाकर प्रतिनिधियों की सूझबूझ व अपने विवेक से जो कार्य संपादित हो रहा है. वह जिले व प्रदेश के लिए गर्व की बात है. कुछ पंचायत के प्रतिनिधि ने पंचायतनामा से अपनी उपलब्धियों को साझा किया और उसे गिनाया.

डाभाकेंद्र पंचायत के मुखिया जयकुमार मोहली ने बताया कि हमने सर्वप्रथम पंचायत में जन वितरण दुकानों में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोका व सरकार द्वारा तय तिथि को खाद्यान्न व केरोसिन वितरण सुनिश्चित कराया.  इन कार्यो में हमारे पंचायत के वार्ड सदस्यों ने काफी सहयोग किया. वे कहते हैं कि इसी कारण वश जन वितरण प्रणाली के दुकानदार मुङो अपने किसी दुश्मन से कम नहीं समझते  हैं.

श्री मोहली ने बताया कि कुछ ऐसा ही गड़बड़झाला सरकारी विद्यालय संचालन में था.  जिसे उन्होंने नियमित निरीक्षण एवं अभिभावकों को जागरूक कर विद्यालय के संचालन को सुव्यवस्थित किया. गायब रहने वाले शिक्षक को कड़ा निर्देश दिया कि वे अपने कर्तव्यों का बेहतर ढंग से निर्वहन करें. आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार वितरण के दौरान वे उपस्थित होते, जिससे व्यवस्था सुधरी. इसका लाभ पंचायत वासियों को मिला.

रूपडीह पंचायत के मुखिया सुरजमुनी मरांडी ने बताया कि पहले भी मनरेगा योजना का क्रि यान्वयन पंचायत में होता था. परंतु बिचौलिया एवं पंचायत कर्मी की मिलीभगत से अनुपयोगी स्थलों पर योजना क्रियान्वित होता था. लेकिन जब से मनरेगा योजना की जिम्मेवारी मुङो मिली है, तब से मैंने सर्वप्रथम पंचायत के वैसे आठ गांव जहां के लोग पगडंडी के सहारे आवाजाही करते थे, वहां मिट्टी-मोरम की सड़क बनवाया. छोटे-छोटे पीसीसी सड़क बनवाये.

पंचायत के बहुत सारे वंचित किसान जिन्हें सिंचाई करने का सुविधा नहीं था, वैसे किसानों की जमीन में सिंचाई कूप की स्वीकृत करवाया व कार्य को पूर्ण करवाया. पंचायत वासियों को यदि किसी प्रकार का किसी प्रकार के परिचय की आवश्यकता होती है, तो उसे वे आसानी से उपलब्ध कराते हैं. गांव में होने वाले विवादों को वे ज्यादा से ज्यादा समय देकर निबटाते हैं.

चंदाडीहलखनपुर के मुखिया नुनुलाल सोरेन ने बताया कि वे पारा शिक्षक की नौकरी छोड़ कर मुखिया बना, लेकिन जिस प्रकार की जवाबदेही पंचायत को सरकार द्वारा दी गयी वह बच्चे को खिलौने पकड़ाने से कम नहीं है.  वे कहते हैं : मैंने अपने विवेक से कुछ कार्य अपनी पंचायत के लिए करने का प्रयास किया. सर्वप्रथम यह कि मेरी पंचायत अंतर्गत करमदाहा नामक स्थान जो  पंचायत का मुख्य बाजार था, वहां की दुकानों को अंचल द्वारा तोड़वाया गया था, लेकिन पुन: तमाम वार्ड सदस्यों के प्रयास से यहां से रोजगार प्राप्त करने वाले दुकानदारों को पुन: बसाया और करमदाहा को पुन: संवारा. साथ ही नारायणपुर से करमदाहा ब्रीज को जोड़ने वाली सड़क में करीब एक हजार फीट की सड़क जो कच्ची थी उसे जिला परिषद द्वारा स्वीकृत करवा कर सड़क निर्माण करवाया. पंचायत के तीन गांवों जहां आंगनबाड़ी केंद्र के लिए सेविका चयन में काफी विवाद होता था, वहां सेविका का चुनाव संपन्न कराया. मकर संक्रांति के अवसर पर पंचायत में लगने वाले 15 दिवसीय मेले की डाक राशि ज्यादा रहने के कारण डाक लेने के लिए कोई व्यक्ति तैयार नहीं था, तब उन्होंने 2013 में अपने अगुवाई में अंचल कार्यालय से डाक लिया और मेला का सफल आयोजन कराया. यह बड़ी उपलब्धि है. 

शहरपुर पंचायत के मुखिया सुचित्र मुरमू कहती हैं : एक गृहिणी होते हुए जब मैंने पंचायत की मुखिया का पद संभाला,  तब से मुङो पूरा पंचायत परिवार जैसा लगता है. पंचायत में जो भी कार्य किये गये वे सारे विकास कार्य ग्रामसभा की स्वीकृति के बाद ही हुए. मैंने ग्रामसभा को प्राथमिकता दी है. चाहे पंचायत के विभिन्न गांव में 13वें वित्त आयोग की राशि को खर्च करने का मामला हो या सहिया चयन का. सर्वसम्मति से इन कार्यो को पूरा किया गया. उन्होंने अपनी पंचायत में नशामुक्ति अभियान भी छेड़ा है और फिलहाल उसे सफल बनाने में लगी हैं.

 बोरवा पंचायत के मुखिया लोगोरी सोरेन ने बताया कि मेरी पंचायत पहाड़ी से घिरी हुई है. यहां विकास कार्य के लिए काफी पैसे एवं जागरूकता की आवश्यकता है. लेकिन इस पंचायत में दोनों की कमी है. फिर भी मैंने मनरेगा, 13वें वित्त आयोग एवं अन्य मद से कई महत्वपूर्ण कार्य किया है. पंचायत में शुद्ध पेयजल की घोर समस्या थी. उसे दूर करने के लिए विभिन्न गांवों में 11 नये चापनल लगवाये, पुराने पेयजल स्नेत की मरम्मत करवायी. कुछेक गांवों के पगडंडी को पीसीसी पथ के रूप में तब्दील करवया. पंचायत में कुछेक गांव हैं जहां सड़क निर्माण की आवश्यकता है. उनकी सूची बनाकर जिले को भेजी. विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, पीडीएस संचालन में व्याप्त गड़बड़ियों को दूर किया. छोटे-मोटे विवाद को गांव में निबटाने की शुरुआत की.

बोरवा पंचायत के पंचायत समिति सदस्य बद्रीनाथ हांसदा ने बताया कि पंचायत के आधा दर्जन गांव जहां बिजली नहीं पहुंची थी, वहां बिजली सेवा बहाल की गयी. बोरवा को मधुवन से जोड़ने वाली सड़क को बहुत प्रयास के बाद करीब छह लाख रुपये की लागत से बनाया गया.

नारायणपुर पंचायत की मुखिया श्रीमती मुनी मरांडी ने कहा कि वे अपनी पंचायत को पूर्ण साक्षर बनाने के लिए प्रयासरत हैं. उन्होंने इसके लिए अभियान मुखिया चुनाव जीतने के बाद ही छेड़ दिया था. मुखिया बनने के बाद करीब डेढ़ सौ वृद्ध एवं असहाय महिलाओं को उन्होंने पेंशन से जोड़ा. मनरेगा के तहत सिंचाई कूप, तालाब, जमीन समतलीकरण जैसे कार्य उन्होंने कराये.

जलछाजन योजना पर हुआ काम

लक्ष्मीनारायण दास, मुखिया संकरी पंचायत, देवघर

साल 2013 देवघर के सदर प्रखंड की संकरी ग्राम पंचायत के लिए शानदार रहा़  ग्राम पंचायत क्षेत्र की बेहतरी के लिए जलछाजन योजना से पानी रोकने का खूब काम हुआ़ जलछाजन से ग्राम पंचायत अंतर्गत छह गांवों में छोटे-बड़े 35 तालाब बनाये गय़े  सभी तालाब 10 फीट गहरे हैं एवं वर्तमान में पानी से भरे हुए हैं. इसमें दो तालाब 90 फीट चौड़े एवं 100 फीट लंबे और तीन तालाब 70 फीट लंबे एवं चौड़े हैं.  30 तालाब की लंबाई एवं चौड़ाई औसतन 40 फीट है़  इसके अलावा ग्राम पंचायत अंतर्गत 12 गांवों में मनरेगा से 26 कुओं का निर्माण कार्य पूरा किया गया़  इन कुओं में अभी 15 से 20 फीट पानी है और आसपास रबी फसल लगी हुई है़  सभी कुएं 2.69 लाख रुपये की लागत से बनाये गये हैं. ग्राम पंचायत क्षेत्र में जलछाजन से हुए काम के बारे में कमेटी के अध्यक्ष नरेश प्रसाद यादव ने बताया कि जलछाजन से उनकी ग्राम पंचायत में दो साल के दौरान 30 लाख रुपये खर्च किये गये हैं.  इस पैसे से तालाब निर्माण के साथ-साथ मेड़बंदी एवं चेक डैम बनाने का काम हुआ है. कमेटी के अध्यक्ष श्री यादव ने बताया कि जलछाजन को जमीन पर उतारने में भूमि संरक्षण विभाग के अभियंताओं एवं कमेटी सदस्यों के अलावा ग्राम पंचायत की भूमिका प्रशंसनीय रही है़.

उन्होंने बताया कि तालाब निर्माण के लिए लाभुक एवं स्थल चयन में ग्राम पंचायत के मुखिया लक्ष्मीनारायण दास ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है़  जलछाजन कमेटी के अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष का चयन मुखिया की अध्यक्षता में हुई आमसभा में हुआ है़  इसके अलावा मुखिया श्री दास ने ग्रामीणों को योजना के बारे में पूरी जानकारी देकर प्रेरित किया तो काम करने में काफी सहुलियत हुई़.

संकरी ग्राम पंचायत के मुखिया लक्ष्मीनारायण दास ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2014-15 में 70 कुआं बनाने का लक्ष्य रखा गया है़  उनके मुताबिक इन कुओं के निर्माण से ग्राम पंचायत क्षेत्र की सिंचाई समस्या का समाधान काफी हद तक हो जायेगा़ उन्होंने बताया कि मनरेगा से बन रहे कुएं ग्रामीणों के लिए काफी फायदेमंद हैं. इसके अलावा नये साल में ग्राम पंचायत कार्यालय से चार किलोमीटर ग्रामीण सड़क का निर्माण कराया जायेगा़.यह निर्माण कार्य मनरेगा से होगा़ मुखिया श्री दास कहते हैं कि विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायत के पास एक मात्र फंड मनरेगा ही है़ ऐसे में मनरेगा से बकरी, गाय एवं मुर्गी पालन के लिए शेड बनाने का भी लक्ष्य रखा गया है़.

मुखिया श्री दास कहते हैं कि गांव एवं पंचायत की बेहतरी के लिए जिन संसाधनों का निर्माण होना था, वह नहीं हो पाया है़  इसके लिए पर्याप्त अधिकार नहीं मिलना एक प्रमुख कारण है़  उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में सरकार की जो भी कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं उसमें बीपीएल नंबर की मांग की जाती है़  इंदिरा आवास, सामाजिक सुरक्षा पेंशन या जन वितरण से अनाज आदि में बीपीएल बहुत जरूरी है़  इंदिरा आवास में सरकार 2007 के सर्वें को नहीं मान रही है़  मुखिया श्री दास की मांग है कि सरकार 2007 के बीपीएल सर्वे को मान्यता द़े  इसके साथ ही नये सिरे से बीपीएल सर्वे अविलंब हो और इसमें मुखिया को पूरी जिम्मेदारी दी जाय़े                               

 ( प्रस्तुति : उमेश यादव )