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मुरुमसिल्ली बांध सूखा अब मानसून का इंतजार

धमतरी (ब्यूरो)। भीषण गर्मी के चलते जिले के बांध सूख गए हैं। बरसात के मौसम में जिन बांधों में दूर-दूर तक पानी ही पानी नजर आता है, वहां अब रेत का मैदान और सूखी हुई जमीन दिखने लगी है। सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति मुरूमसिल्ली बांध की है।

जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 5.839 टीएमसी क्षमता के मुरूमसिल्ली बांध में 4 जून की स्थिति में सिर्फ 0.121 टीएमसी पानी है। बांध पूरी तरह सूख चुका है। यहां उपयोगी जल ही नहीं है। 32.150 टीएमसी के गंगरेल बांध में बमुश्किल 13 टीएमसी पानी बच पाया है।

5 टीएमसी डेड स्टोरेज के पानी को छोड़ दे तो 8 टीएमसी यानि 29 प्रतिशत पानी ही उपयोग के लायक है। दुधावा बांध की क्षमता 10.192 टीएमसी है, यहां सिर्फ 1.340 टीएमसी पानी बचा है। बांध में 11 प्रतिशत ही जलभराव है। 6.995 टीएमसी क्षमता के सोंढूर बांध में 1.040 टीएमसी उपयोग जल है।

यहां साढ़े 16 प्रतिशत पानी ही मौजूद है। जिले के सभी बांधों की स्थिति गर्मी के कारण सूरज के किरणों से होने वाले वाष्पण और सिंचाई व निस्तारी के लिए पानी देने की वजह से कमजोर हुई है। दुधावा बांध में दूर-दूर तक रेत का मैदान नजर आ रहा है। गंगरेल बांध का पानी भी कम हो गया है। दूर के टापू स्पष्ट नजर आने लगे हैं। मुरुमसिल्ली बांध तो दूर से देखने पर बड़े मैदान जैसा दिख रहा है। सोंढूर बांध सूख गया है।

धमतरी (ब्यूरो)। भीषण गर्मी के चलते जिले के बांध सूख गए हैं। बरसात के मौसम में जिन बांधों में दूर-दूर तक पानी ही पानी नजर आता है, वहां अब रेत का मैदान और सूखी हुई जमीन दिखने लगी है। सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति मुरूमसिल्ली बांध की है।

जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 5.839 टीएमसी क्षमता के मुरूमसिल्ली बांध में 4 जून की स्थिति में सिर्फ 0.121 टीएमसी पानी है। बांध पूरी तरह सूख चुका है। यहां उपयोगी जल ही नहीं है। 32.150 टीएमसी के गंगरेल बांध में बमुश्किल 13 टीएमसी पानी बच पाया है।

5 टीएमसी डेड स्टोरेज के पानी को छोड़ दे तो 8 टीएमसी यानि 29 प्रतिशत पानी ही उपयोग के लायक है। दुधावा बांध की क्षमता 10.192 टीएमसी है, यहां सिर्फ 1.340 टीएमसी पानी बचा है। बांध में 11 प्रतिशत ही जलभराव है। 6.995 टीएमसी क्षमता के सोंढूर बांध में 1.040 टीएमसी उपयोग जल है।

यहां साढ़े 16 प्रतिशत पानी ही मौजूद है। जिले के सभी बांधों की स्थिति गर्मी के कारण सूरज के किरणों से होने वाले वाष्पण और सिंचाई व निस्तारी के लिए पानी देने की वजह से कमजोर हुई है। दुधावा बांध में दूर-दूर तक रेत का मैदान नजर आ रहा है। गंगरेल बांध का पानी भी कम हो गया है। दूर के टापू स्पष्ट नजर आने लगे हैं। मुरुमसिल्ली बांध तो दूर से देखने पर बड़े मैदान जैसा दिख रहा है। सोंढूर बांध सूख गया है।धमतरी (ब्यूरो)। भीषण गर्मी के चलते जिले के बांध सूख गए हैं। बरसात के मौसम में जिन बांधों में दूर-दूर तक पानी ही पानी नजर आता है, वहां अब रेत का मैदान और सूखी हुई जमीन दिखने लगी है। सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति मुरूमसिल्ली बांध की है।

जल संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 5.839 टीएमसी क्षमता के मुरूमसिल्ली बांध में 4 जून की स्थिति में सिर्फ 0.121 टीएमसी पानी है। बांध पूरी तरह सूख चुका है। यहां उपयोगी जल ही नहीं है। 32.150 टीएमसी के गंगरेल बांध में बमुश्किल 13 टीएमसी पानी बच पाया है।

5 टीएमसी डेड स्टोरेज के पानी को छोड़ दे तो 8 टीएमसी यानि 29 प्रतिशत पानी ही उपयोग के लायक है। दुधावा बांध की क्षमता 10.192 टीएमसी है, यहां सिर्फ 1.340 टीएमसी पानी बचा है। बांध में 11 प्रतिशत ही जलभराव है। 6.995 टीएमसी क्षमता के सोंढूर बांध में 1.040 टीएमसी उपयोग जल है।

यहां साढ़े 16 प्रतिशत पानी ही मौजूद है। जिले के सभी बांधों की स्थिति गर्मी के कारण सूरज के किरणों से होने वाले वाष्पण और सिंचाई व निस्तारी के लिए पानी देने की वजह से कमजोर हुई है। दुधावा बांध में दूर-दूर तक रेत का मैदान नजर आ रहा है। गंगरेल बांध का पानी भी कम हो गया है। दूर के टापू स्पष्ट नजर आने लगे हैं। मुरुमसिल्ली बांध तो दूर से देखने पर बड़े मैदान जैसा दिख रहा है। सोंढूर बांध सूख गया है।

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