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यूपी: लिंचिंग, पुलिस की जाँच और इंसाफ़

-बीबीसी,

साल 2015 की बात है, यूपी के दादरी में अख़लाक़ को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला, ये गाय के नाम पर की गई मॉब लिंचिंग की संभवत: पहली घटना थी जो आने वाले वक्त में एक तयशुदा स्क्रिप्ट की तरह दोहराई जाने लगी.

बीते छह साल में देश के कई राज्यों से एक-के-बाद एक लिंचिंग की ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जिनमें मारे जाने वाले व्यक्ति की धार्मिक पहचान उसकी हत्या की वजह थी, ऐसी हत्याओं को दुनिया के कई देशों में 'हेट क्राइम' की श्रेणी में रखा जाता है. भारत में 'हेट क्राइम' के तहत आँकड़े दर्ज नहीं किए जाते.

पिछले कुछ सालों में देश के कई राज्यों में धर्म के आधार पर निशाना बनाकर की गई हिंसा और मॉब लिंचिंग (भीड़ की हिंसा की वजह से मौत) की घटनाएँ सामने आई हैं.

चूँकि देश में हेट क्राइम के सरकारी आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए बीबीसी ने साल 2016 और साल 2021 में उत्तर प्रदेश में धर्म के आधार पर भीड़ की गंभीर हिंसा के आंकड़ों का अध्ययन किया और पाया कि  2016 में जनवरी से लेकर अगस्त तक मुसलमानों के साथ हेट क्राइम के 11 गंभीर मामले सामने आए, जबकि साल 2021 में जनवरी से लेकर अगस्त के बीच मुसलमानों के खिलाफ़ संगीन हिंसक वारदातों की संख्या 24 थी.

यहाँ हमने उत्तर प्रदेश के केवल संगीन मामलों को शामिल किया है. हिंसा, मारपीट के छिट-पुट मामले होते रहे हैं जो न तो मीडिया में रिपोर्ट हो पाते हैं और न ही पुलिस को रिपोर्ट किए जाते हैं लेकिन अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना पैदा करते हैं.

साल 2019 में मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट आई जिसके मुताबिक़ 'हेट क्राइम' के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है. यहाँ ध्यान रखा जाना चाहिए कि आबादी के हिसाब से उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और हेट क्राइम के एमनेस्टी के आंकड़ों में मुसलमानों के अलावा दलितों के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा भी शामिल है.

ये समझना ज़रूरी है कि धर्म या जाति के आधार पर हुई मारपीट की घटनाएँ ही 'हेट क्राइम' के दायरे में आती हैं, हर मारपीट या लिंचिंग को 'हेट क्राइम' नहीं कहा जा सकता, मसलन, धार्मिक शिनाख्त के बिना किसी जेबकतरे को अगर भीड़ पीट-पीटकर मार डाले, तो ये लिंचिंग है, लेकिन हेट क्राइम नहीं है, भीड़ में शामिल लोगों की धार्मिक पहचान से भी तय होता है कि वह घटना हेट क्राइम है, या नहीं.

जब भीड़ किसी व्यक्ति की जान ले लेती है तो उसे तकनीकी तौर पर लिचिंग माना जाता है. कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें हमले के पीछे पीड़ित व्यक्ति के धर्म की कोई भूमिका नहीं थी, उन्हें हेट क्राइम नहीं कहा जा रहा.

उत्तर प्रदेश में हिंसक भीड़ के हमलों की घटनाओं पर अतिरिक्त महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार बीबीसी से कहते हैं, "हमने डीजीपी स्तर पर कई सर्कुलर जारी किए हैं और वक़्त-वक़्त पर इन सर्कुलरों को दोहराते भी रहे हैं कि ऐसी लिंचिंग किसी भी कीमत पर नहीं होनी चाहिए, अगर किसी ने कुछ गलत किया भी है तो लोगों को उसे पीटने का कोई हक़ नहीं है और ऐसा होता है तो पीटने वाले के खिलाफ़ कठोर कार्रवाई की जाती है. किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो."

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