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यूनेस्को ने जताई आशंका, खत्म हो जाएंगी सात भाषाएं

दुनिया में बोली जाने वाली असंख्य भाषाओं में से सात ऐसी भाषाएं हैं जो खत्म होने के कगार पर पहुंच गई हैं। इनमें एक ऐसी भाषा भी है, जिसमें बेचने और खरीदने के लिए कोई शब्द ही नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से किए गए अध्ययन में आशंका जताई गई है कि कई ऐसी भाषाएं हैं, जिनका अस्तित्व अप्रत्याशित रूप से संकट में है।


एक अनुमान के मुताबिक ईसा से आठ हजार वर्ष पूर्व तकरीबन दो हजार बोलियां या भाषाएं प्रचलित थीं। आज इनमें से महज साढ़े छह हजार ही बची हैं। यूनाइटेड नेशन्स एजुकेशनल साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (यूनेस्को) ने अपने शोध में दो हजार भाषाओं को संकटग्रस्त बताया है।


विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व की 97 फीसदी आबादी चार फीसदी भाषाएं बोलती है, जबकि तीन फीसदी आबादी 96 फीसदी भाषाएं बोलती है। इसका अर्थ यह हुआ कि अगर कोई छोटा समूह अपनी क्षेत्रीय भाषा बोलना बंद कर देता है तो उसपर विलुप्त होने का खतरा मंडराने लगता है।


हर दिन खत्म हो जाते हैं दो सौ विभिन्न प्रजातियां

एक अनुमान के मुताबिक पक्षियों, कीट, स्तनपायी और पौधों की तकरीबन दो सौ प्रजातियां विलुप्त हो जाती हैं।

दो हफ्ते में खत्म हो जाती है एक भाषा

शोधकर्ताओं का दावा है कि एक भाषा प्रत्येक दो हफ्ते में विलुप्त हो जाती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ अनुमान है और सच्चाई इसे अधिक तकलीफदेह हो सकती है।

1. अका : यह भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में बोली जाने वाली भाषा है। यह भाषा जिस कस्बे में बोली जाती है, वहां के युवा अब हिंदी को अधिक तरजीह देते हैं क्योंकि टीवी, रेडियो और संगीत में इस भाषा की अधिक पैठ है। इसके अलावा इस कस्बे तक पहुंचने के लिए साढ़े पांच घंटे का सफर तय करना पड़ता है, जो जंगल से होकर गुजरता है। अका बोलने वाले कुछ हजार लोग ही बचे हैं।


2. जेडेक : यह भाषा मलय प्रायद्वीप के छोटे से गांव में बोली जाती है। बीते वर्ष ही इसकी खोज हुई है और इसे बोलने वाले 280 लोग ही बचे हैं। इस भाषा में बेचने, खरीदने और चोरी करने के लिए कोई शब्द ही नहीं है। हालांकि इसमें बांटने और आदान-प्रदान के लिए शब्द हैं।


3. आइसलैंडिक : इस भाषा का विलुप्त हो रही भाषाओं की सूची में शुमार होना हैरत में डालता है क्योंकि यह एक पूरे देश में बोली जाने वाली भाषा है। यह आइसलैंड की सबसे प्राचीन भाषा है और 13वीं शताब्दी से बोली जा रही है। भाषा विशेषज्ञ इसे अपने जटिल व्याकरण के लिए जानते हैं। आइसलैंड में अंग्रेजी भाषा युवावर्ग के बीच अधिक प्रचलित है क्योंकि सोशल मीडिया समेत पूरे इंटरनेट पर इसी भाषा में काम होता है।


4. मार्शलीज : विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भाषा के खत्म होने का कारण कई बार पर्यावरण भी हो सकता है। मार्शल द्वीप पर बोली जाने वाली मार्शलीज के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। ऑस्ट्रेलिया और हवाई के बीच बसे इस द्वीप से लोग पलायन कर रहे हैं क्योंकि जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते जल स्तर के कारण यहां रहना मुश्किल होता जा रहा है।


5. विंटू : यूनेस्को के अध्ययन के मुताबिक विंटू भाषा को धाराप्रवाह बोलने वाला सिर्फ एक व्यक्ति बचा है। इसके अलावा कुछ मुट्ठीभर अन्य लोग इसे जानते हैं। यूनेस्को ने जल्द ही इसके पूरी तरह विलुप्त होने की आशंका जाहिर की है। उत्तरी अमेरिका में यूरोपीय लोगों के आने से पहले विंटू जनजाति की जनसंख्या 14 हजार थी। अब यह घटकर महज डेढ़ सौ रह गए हैं।


6. टोफा : यूनेस्को के अध्ययन में शोधकर्ताओं ने आशंका जताई है कि धारा प्रवाह टोफा बोलने वाले कुल 40 लोग बचे हैं। यह साइबेरियाई भाषा रूस के सुदूर क्षेत्र इरकुस्क ओब्लास्ट में टाफालार्स बोलते हैं। पूर्वी सायान पर्वत श्रंखला में बसे तीन गांवों में यह भाषा बोली जाती है और यहां पहुंचना काफी मुश्किल है। बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने वाले यहां के बच्चे अब रूसी भाषा का अधिक इस्तेमाल करने लगे हैं।


7. एल्फादालियां : यह भाषा आठवीं से दसवीं शताब्दी के बीच उत्तर सागर के समुद्री डाकुओं के बीच बोली जाने वाली ओल्ड नॉर्स भाषा के काफी करीब है। वर्तमान में इसे स्वीडन के सुदूर क्षेत्र एल्वदालें के लोग बोलते हैं। इसे बोलने वाले तीन हजार लोग बचे हैं और अब अधिकांश लोग स्वीडिश भाषा को अपना चुके हैं।