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रबी फसलों के लिए भावांतर योजना में बदलाव कर सकती है सरकार

भोपाल। खरीफ फसलों की भावांतर भुगतान योजना में खरीदी के साथ-साथ सरकार ने रबी सीजन के लिए भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। योजना में मिल रहे अनुभवों को देखते हुए मौजूदा प्रावधानों में कुछ बदलाव भी किए जा सकते हैं।

अभी योजना में गुणवत्ता को लेकर कोई बंधनकारी शर्त नहीं है। योजना में ग्रेडिंग सिस्टम यानी औसत दर्जे से बेहतर और कमतर उपज का पैमाना रखा जा सकता है। संभावना जताई जा रही है कि रबी फसलों का रकबा अधिक होने और योजना के फायदे को देखते हुए पंजीयन में तीन गुना तक वृद्धि हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कृषि और मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों को पायलट आधार पर लागू की गई योजना में अनुभव को देखते हुए आगामी सीजन में जरूरी बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। इसके मद्देनजर 25 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को मैदान में भी उतार दिया है। ये सभी किसान और व्यापारियों से बात करने के अलावा मंडियों में स्थितियों का आकलन कर सरकार को रिपोर्ट सौंपेंगे।

इसके आधार पर योजना में बदलाव प्रस्तावित किए जाएंगे। कैबिनेट में विचार करने के बाद इसे आगामी रबी सीजन में लागू किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि योजना में अभी फसल की गुणवत्ता को लेकर कोई पैमाना नहीं है। यदि औसत गुणवत्ता से कम की फसल मंडी में बिकती है तो स्वाभाविक है कि व्यापारी उसके कम भाव लगाएगा।

इसको लेकर विवाद की स्थिति बनती है। इसे दूर करने के लिए औसत दर्जे से बेहतर और कमतर उपज का पैमाना लगाया जा सकता है। इसके आधार पर भावांतर तय करने का फॉर्मूला भी बनाया जा सकता है। दरअसल, रबी फसलों का रकबा अधिक रहता है। योजना में भावांतर मिलने की वजह से पंजीयन भी तीन गुना तक बढ़ सकता है। अभी 16 लाख से ज्यादा किसानों ने लगभग 19 लाख पंजीयन कराए हैं।

संचालक कृषि मोहनलाल मीणा का कहना है कि देश में किसी भी योजना का इतना बड़ा पायलट प्रोजेक्ट नहीं हुआ है। योजना शुरुआती दौर में है। अनुभव के आधार पर इसमें जो भी सुधार करने की जरूरत होगी, उसे उच्च स्तर पर विचार-विमर्श कर अवश्य किया जाएगा।

गेहूं की जगह लेंगे चना और सरसों

प्रदेश में कमजोर मानसून की वजह से इस बार गेहूं का रकबा लगभग आठ लाख हेक्टेयर घटने का अनुमान है। इस बार रबी फसलों के लिए 118 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी का लक्ष्य रखा गया है। गेहूं पिछले साल 64.22 लाख हेक्टेयर में बोया गया था, लेकिन इस बार इसका लक्ष्य 55.99 लाख हेक्टेयर रखा गया है।

कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि कुल रकबा तो नहीं घटेगा पर गेहूं के क्षेत्र में कमी हो सकती है। इसकी पूर्ति चना और सरसों से हो सकती है। चने के रकबे में करीब 5 लाख हेक्टेयर की वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। दरअसल, चना सीमित सिंचाई में भी हो जाता है। इसी तरह सरसों का क्षेत्र भी बढ़ रहा है।