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राजस्थान दलहन उत्पादन में देशभर में अव्वल

जयपुर। खेती के लिहाज से देशभर में ख्यातनाम इंदिरा गाधी नहर क्षेत्र परियोजना समेत अन्य इलाकों में दलहन की जबर्दस्त पैदावार से राजस्थान जहा एक ओर दलहन उत्पादन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हाथों से पुरस्कृत किया गया, वहीं प्रतिपक्ष राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं करने का आरोप लगा रहा है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रतिपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार किसानों का ख्याल नहीं रखती तो दलहन उत्पादन में राजस्थान पहले स्थान पर कैसे आ गया। आरोप सोच समझ कर लगाएं केवल रस्म अदायगी के लिए नहीं। मुख्यमंत्री बनने के साथ ही मैंने किसानों को बिजली की दरों में पाच साल तक वृद्धि नहीं करने का ऐलान कर दिया था। साथ ही उनकी उपज का उचित मूल्य दिलवाने के लिए पूरे प्रबंध किए। तत्कालीन भाजपा सरकार ने किसानों का ध्यान नहीं रखकर मात्र 90 बी [कृषि भूमि का व्यावसायिककरण में परिर्वतन] पर ध्यान दिया था।

फोर्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष कमल कंदोई ने कहा कि जीरे समेत अन्य कृषि जिंस में राज्य अव्वल है। अन्य राज्यों के समान किसानों के आदोलन नहीं हुए, बिजली की कमी का किसानों को जरूर सामना करना पड़ रहा है।

भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष प्रो सावर लाल जाट ने कहा काग्रेस ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में सरकार बनने पर किसानों को आठ घटे बिजली देने का वादा किया था, जबकि मौजूदा समय में किसानों को मात्र दो से तीन घटे बिजली दी जा रही है। जाट ने कहा कि केंद्र सरकार को स्वामीनाथन रिपोर्ट की सिफारिशों को तुरंत लागू करना चाहिए जिससे राज्य के किसानों को भी लाभ मिले।

मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया ने राज्य सरकार से किसानों के कृषि कनेक्शन को गारंटी लोक सेवा कानून में शािमल करने की माग करते हुए कहा कि सेवा क्षेत्र, व्यापार क्षेत्र, उद्योग क्षेत्रों में आमदनी एवं मजदूरी बढ़ी है, जबकि किसान की आमदनी घटी है क्योंकि केंद्र एवं राज्य सरकार उनके उत्पादन का उचित मूल्य नहीं दे रही हैं। पिछले 20 वषरें में सरकारी कर्मचारियों का वेतन 18 गुना बढ़ा है वहीं समर्थन मूल्य मात्र पाच प्रतिशत बढ़ा है।

निर्दलीय चुनाव जीत कर कृषि मंत्री मंत्री बने हरजी राम बुरडक ने कहा कि भारत सरकार ने वर्ष 2010-11 में दलहनी फसलो के अधिकतम उत्पादन के लिए राजस्थान को एक करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि 2005-06 से 2009-10 के औसत बोए गए क्षेत्र 35.28 लाख हेक्टेयर की तुलना में वर्ष 2010-11 में 47.22 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई। यह बुवाई औसत से करीब 33 प्रतिशत अधिक है।

कृषि मंत्री ने कहा कि वर्ष 2005-06 से 2009-10 के औसत उत्पादन 12.92 लाख टन के मुकाबले वर्ष 2010-11 में 32.32 लाख टन उत्पादन हुआ है, जो गत पाच साल के औसत उत्पादन का ढाई गुना है। उन्होंने कहा बिजली की कुछ कमी जरूर है, उसकी पूर्ति करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। सरकार ने महंगी दरों पर बिजली खरीद कर एवं बड़ी औद्योगिक इकाइयों की बिजली काट कर किसानों को फसल पकाने के लिए बिजली दी है।

उन्होने कहा किसानों को खाद भरपूर मात्रा में दी गई। कभी कभार खाद की आपूर्ति समय पर नहीं पंहुचने की वजह से कोई दिक्कत आई होगी। सहकारी संस्थाओं ने अपने केंद्रों से खाद वितरित की है।

बुरडक ने कहा कि सरकार ने किसानों के उन्नयन एवं समस्याओं के समाधान के लिए किसान आयोग का गठन किया गया है। आयोग किसानों की खाद, रिण, मंडी व्यवस्था समेत अन्य समस्याओं का निदान करने के साथ ही कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना करने के लिए मार्गदर्शन भी करेगा।

उन्होने कहा कि वर्ष 2011 में खरीफ की फसल के दौरान मौसम आधारित फसल बीमा योजना के जरिए 47.38 लाख कृषकों का बीमा कर 150.05 करोड़ रुपये की किस्त का भुगतान किया गया।

बुरडक के अनुसार किसानों को अच्छी गुणवता का बीज उपलब्ध करवाने के लिए बाड़मेर, नागौर, जोधपुर, जालौर, सीकर, झुंझुनूं, चूरु एवं बीकानेर में हाई ब्रिड बाजरा के निशुल्क 16,587 क्विंटल बीज राजस्थान राज्य बीज निगम के माध्यम से 11.05 लाख किसानों को उपलब्ध करवाया गया है।

सहकारिता मंत्री परसादी लाल मीणा के अनुसार किसानों को बुवाई के समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सहकारिता, इंडियन पोटाश लिमिटेड एवं इफको के सहयोग से किसानों को उर्वरक वितरित किया गया है।