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विकास की रफ्तार बढ़ाएंगे निरंतर जारी सुधार

हांगकांग। विदेशी निवेशकों को लुभाते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भारत में कारोबार करना सुगम बनाने का वादा किया है। उन्होंने कहा है कि निरंतर जारी सुधारों के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विपरीत माहौल के बावजूद आर्थिक विकास की दर बीते साल के 7.3 फीसद की तुलना में ज्यादा रहेगी।

वित्त मंत्री मानते हैं कि दुनिया पर छाए सुस्ती के बादलों के बीच भी भारत में चमकता सितारा बने रहने की क्षमता है। राजकोषीय घाटा नीचे आ रहा है। महंगाई काफी कुछ नियंत्रण में है। आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर भारत की सुनहरी तस्वीर पेश करते हुए जेटली ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्यूफैक्चरिंग और ऐसे अन्य सेक्टरों में निवेश की अपील की जिनमें फंडिंग की जरूरत है। सिंगापुर और हांगकांग के चार दिवसीय दौरे के अंतिम दिन जेटली ने कहा कि वह मानते हैं कि भारत अकूत क्षमताओं वाला देश है। वित्त मंत्री यहां एपीआइसी-इंडिया कैपिटल मार्केट्स एंड इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर समिट के उद्घाटन पर पहुंचे थे।

विदेशी निवेश महत्वपूर्ण

वित्त मंत्री ने इस बात का साफ उल्लेख किया कि विदेशी निवेश देश के लिए संसाधन का महत्वपूर्ण स्रोत साबित होगा। छह महीनों के भीतर मध्यस्थता के जरिये विवादों का निपटान सुनिश्चित करने के लिए नए कानून सहित सरकार कई सुधारों पर काम कर रही है। कारोबार करना सुगम बनाने के लिए कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि वह चुनौतियों से बखूबी अवगत हैं। भारत ने बीते वित्त वर्ष 2014-15 में 7.3 फीसद की आर्थिक विकास दर हासिल की। पूरी उम्मीद है कि इससे बेहतर आर्थिक वृद्धि की रफ्तार हासिल करेंगे।

राजकोषीय घाटा कम करेंगे

जेटली के मुताबिक, राजकोषीय घाटा धीरे-धीरे नीचे आ रहा है। दो से तीन साल में इसे तीन फीसद पर लाने का लक्ष्य है। चालू खाते का घाटा 1.2 फीसद है। विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति अच्छी है। महंगाई नियंत्रण में है। लिहाजा व्यापक आर्थिक संकेत सकारात्मक हैं।

कर व्यवस्था होगी प्रतिस्पर्धी

जेटली ने सरल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी कर व्यवस्था मुहैया कराने का वादा किया है। साथ ही भरोसा जताया है कि सरकार अगले वित्त वर्ष तक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था लागू कर लेगी। उनके मुताबिक, जीएसटी महत्वपूर्ण कराधान सुधारों में से एक है। सरकार ने रक्षा और मैन्यूफैक्चरिंग सहित कई सेक्टरों को खोला है। विदेशी निवेशकों को आश्वस्त करते हुए जेटली ने कहा कि कर मुद्दों का समाधान सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में है। उन्होंने इस बात को स्वीकारा कि कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर कम है, जो चुनौती पेश कर रही है।

सरकारी बैंक बनेंगे मजबूत

जेटली ने सरकारी बैंकों को तत्काल मजबूत बनाने की जरूरत बताई है। साथ ही कहा है कि बैंकों के फंसे कर्जों (एनपीए) के स्तर को घटाना उनकी शीर्ष प्राथमिकता है। एनपीए के मौजूदा स्तर पर वह वह पूंजी नहीं जारी करेंगे। अगले तीन साल में बेसिल-3 मानकों को अपनाया जाएगा। लिहाजा, बजट से 70 हजार करोड़ रुपये के साथ 1.80 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत है।