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शोषण से मुनाफा: निजी क्षेत्र में जबरन मजदूरी से हो रहा सालाना 20 लाख करोड़ का अवैध मुनाफा

मोंगाबे हिंदी, 21 मार्च

क्या आप जानते हैं कि दुनिया में करीब 2.76 करोड़ लोग हर दिन जबरन मजदूरी करने को मजबूर हैं। मतलब कि प्रति हजार लोगों पर 3.5 लोग वो हैं जो आधुनिक दासता के इस दलदल में फंसे हैं। यह जानकारी अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) द्वारा जारी नई रिपोर्ट 'प्रोफिट्स एंड पावर्टी: द इकोनॉमिक्स ऑफ फोर्स्ड लेबर' में सामने आई है।

आंकड़ों के मुताबिक जबरन मजदूरी के हर 10 में से नौ यानी करीब 86 फीसदी मामलों में निजी क्षेत्र की भूमिका है। वहीं राज्यों की हिस्सेदारी करीब 14 फीसदी है। हालांकि आईएलओ ने अपनी इस रिपोर्ट में सरकारी क्षेत्रों द्वारा जबरन श्रम से किए जा रहे अवैध मुनाफे को शामिल नहीं किया है।

आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि निजी क्षेत्र में जबरन मजदूरी में लगे 37 फीसदी यानी 63 लाख श्रमिक औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े थे। वहीं 32 फीसदी यानी 55 लाख के साथ सेवा क्षेत्र दूसरे स्थान पर था। इसी तरह कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 12 फीसदी थी। मतलब की 21 लाख मजदूर कृषि क्षेत्र से जुड़े थे। वहीं घरेलु कार्यों के क्षेत्र में यह आंकड़ा 14 लाख वहीं अन्य क्षेत्रों में 19 लाख (11 फीसदी) दर्ज किया गया है।

वहीं यदि 2016 से 2021 के आंकड़ों पर गौर करें तो इस दौरान जबरन मजदूरी करने को मजबूर लोगों की संख्या में 27 लाख का इजाफा हुआ है। आईएलओ के मुताबिक जबरन मजदूरी या जबरन कराया जा रहा श्रम अपराध होने के साथ-साथ इंसानों के मौलिक अधिकारों का भी गंभीर रूप से किया जा रहा हनन है।

इसका असर न केवल पीड़ित पर पड़ता है बल्कि सारे समाज को इसकी आर्थिक और सामाजिक कीमत चुकानी पड़ती है। रिपोर्ट के मुताबिक निजी क्षेत्र को इस जबरन मजदूरी के चलते सालाना करीब 19.6 लाख करोड़ रुपए (23,600 करोड़ डॉलर) का अवैध मुनाफा हो रहा है। वहीं यदि 2014 के बाद से, देखें तो इस मुनाफे में 37 फीसदी का इजाफा हुआ है, जो करीब 6,400 करोड़ डॉलर है।

रिपोर्ट की मानें तो मुनाफे में हुई यह वृद्धि, जबरन श्रम में लगे पीड़ितों की संख्या में हुए इजाफे और अधिक मुनाफे के चलते हुई है। इस जबरन मजदूरी से सबसे अधिक होने वाले कुल वार्षिक मुनाफे को देखें तो इस मामले में यूरोप और मध्य एशिया क्षेत्र अव्वल है, जहां हर साल इससे 8,400 करोड़ डॉलर का मुनाफा हो रहा है। वहीं एशिया प्रशांत क्षेत्र 6,200 करोड़ डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं अमेरिका में 5,200 करोड़ डॉलर, अफ्रीका में 2,000 करोड़ डॉलर और अरब देशों में 1800 करोड़ डॉलर का मुनाफा हो रहा है।
पूरी खबर- मोंगाबे हिंदी