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शिविर में नसबंदी के बाद चार पुरुषों की हालत बिगड़ी, मचा हड़कंप

बिलासपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोटा में बुधवार को पुरुष नसबंदी शिविर आयोजित किया गया। इस दौरान लापरवाही से 4 ग्रामीणों की हालत बिगड़ गई। मामले को दबाने पीड़ितों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां तीसरी बार पीड़ितों की नसबंदी कराई गई। उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।


कोटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को पुरुष नसबंदी शिविर लगाया गया था। इसमें 14 पुरुषों को भर्ती किया गया था। दोपहर 3 बजे नसबंदी ऑपरेशन शुरू किया गया। लेकिन इस दौरान ग्राम मझगांव के धमेंद्र श्रीवास पिता रामेश्वर श्रीवास, राजकुमार पिता महेत्तर लाल, केशव विश्वकर्मा पिता सहजराम विश्वकर्मा के साथ ग्राम डोंगी निवासी प्रमोद साहू पिता गणेश साहू का ऑपरेशन सही ढंग से नहीं किया जा सका।


ऑपरेशन के बाद लगातार खून बहने लगा। तब नसबंदी करने वाले सर्जन व पूर्व बिल्हा बीएमओ डॉ. शरद गढ़ेवाल को गड़बड़ी की आशंका हुई। इसके बाद चारों का दोबारा ऑपरेशन किया गया, लेकिन दूसरी बार भी खून बहना नहीं रुका।


रात 10 बजे तक पीड़ितों की हालत और गंभीर हो गई। तब डॉक्टरों ने इसके जानकारी स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को दी। इससे अधिकारी सकते में आ गए और तत्काल मामले को दबाने की कोशिश में जुट गए। इस दौरान मरीजों को सिम्स न भेजकर सरकंडा के स्व. कार्तिक राम साव हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। यहां चारों की तीसरी बार नसबंदी ऑपरेशन किया गया।


इससे पीड़ितों का खून बहना तो रुक गया, लेकिन शरीर से ज्यादा मात्रा में खून बहने से हालत खराब हो गई। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक साथ कई नसबंदी करने पर कुछ मामलों में परेशानी होती है, जिसे ठीक कर लिया जाता है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ होगा, लेकिन अधिकारी ऑपरेशन के दौरान क्या गड़बड़ी हुई है, उसे सामने लाने से बच रहे हैं।


13 महिलाओं की मौत के बाद थम गई थी नसबंदी


8 नवंबर 2014 को ग्राम पेंडारी स्थित नेमीचंद हॉस्पिटल में नसबंदी शिविर लगाई गई थी। इस शिविर में ऑपरेशन में गड़बड़ी होने के कारण 13 महिलाओं की मौत हो गई थी। साथ ही 100 से ज्यादा महिलाएं गंभीर रूप से बीमार हो गई थीं।


इस घटना से छत्तीसगढ़ के साथ ही पूरे देश में सरकारी अस्पतालों में नसबंदी कराना एकदम से बंद हो गया था। इसी के बाद लोग नसबंदी कराने से डरते हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ग्रामीणों को लालच देकर नसबंदी कराने के लिए बाध्य करते हैं और शिविर में गड़बड़ी होने से मामला बिगड़ जाता है।


क्या कहते है नसबंदी करने वाले डॉक्टर


इस संबंध में नसबंदी करने वाले डॉक्टर शरद गढ़ेवाल का कहना है कि ज्यादातर नसबंदी शिविर में एक साथ दर्जनों लोगों की नसबंदी करने पर इस तरह की समस्या आती है। इन मामलों में ऑपरेशन के बाद खून का थक्का जमने से परेशानी हुई है, जिसे ठीक कर लिया गया है।


- एक साथ कई नसबंदी होने पर कुछ मामलों में समस्या आती है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। पीड़ितों का उपचार किया जा रहा है। सभी की हालत सामान्य हो गई है। डॉ. साव नसबंदी के जाने माने डॉक्टर हैं इसलिए पीड़ितों को उनके अस्पताल में भर्ती कराया गया है। - डॉ. बीबी बोर्डे, सीएमओ


- कोटा के पुरुष नसबंदी शिविर में गड़बड़ी नहीं हुई है। कुछेक मामलों में परेशानी आती है। स्थिति सामान्य कर ली गई है। - डॉ. सुजाय मुखर्जी, नोडल अधिकारी, फैमिली प्लानिंग


- ऑपरेशन के बाद पीड़ितों को कुछ समस्याएं हुई हैं। इसे देखते हुए उन्हें निजी अस्तपाल भेजा गया, जहां फिर से ऑपरेशन कर स्थिति सामान्य किया गया है। - डॉ. प्रदीप अग्रवाल, बीएमओ, कोटा